AniruddhaFoundation-Aniruddha's Universal Bank of Raamnam

संकल्पना स्थापना :

सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूजी ने गुरुवार दिनांक १८ अगस्त २००५ के शुभ दिन ‘श्रीहरिगुरुग्राम’- बांद्रा में, ‘अनिरुद्धाज्‌ युनिर्व्हसल बैंक ऑफ रामनाम’ की स्थापना की। इस संकल्पना का मूल उद्देश्य सर्वसामान्य श्रद्धावानों को कलिकाल को मात देने के लिए और प्रारब्ध के तड़ाखे से बाहर निकलके जीवन सुखी और आनंदित करना ही है।

कार्यस्वरूप :

सर्वसामान्य लोगों को सामान्य बैंक की जानकारी होती है। अन्य बैकों की तरह ही इस बैंक के भी कार्य है। सिर्फ ‘रामनाम’ यह बिलकुल सहज व आसान नाम ही इस अनोखे बैंक का ‘चलन’ है। इस बैंक का मुख्यालय लिंक अपार्टमेंट, खार, मुंबई यहाँ पर है।

रामनाम बही की जानकारी और महत्त्व :

‘रामनाम बही’ यह एक २१६ पेज की बही है, जो श्रद्धावानों को रामनाम लिखने की और उच्चारण की सुवर्णसंधि देती है। इस बही के पहले १०८ पन्नों पर ‘राम’ नाम लिखना है। आगे के प्रत्येक २७ पन्नों पर अनुक्रमानुसार ‘श्रीराम जय राम जय जय राम’, ‘कृष्ण’, ‘दत्तगुरु’ और अंत में २७ पन्नों पर ‘जय जय अनिरुद्ध हरि’ यह मंत्र लिखना है।

जब हमारी प्रिय सीता मैय्या को लंका से लाने के लिए ‘श्रीरामेश्वर से लंका’ तक ऐसा अभेद सेतु वानरसैनिकों को बनाना था। कार्य के व्यापकत्व और दुर्गमता को जानकर श्रीहनुमानजी तुरंत आगे आते हैं और समुद्र में डाले जानेवाले प्रत्येक पाषाण पर अपने हाथों से ‘श्रीराम’ नाम लिखने लगते हैं। श्रीराम के नाम से अजीव तथा जड पाषाण भी पानी में डुबते नहीं है बल्की तैरने लगते है और उनके समुच्चय से समुद्र पर सेतू बाँधा जाता है। श्रद्धावान जब रामनाम बही लिखते है तब उनके अनेक जन्मों के प्रवास के सुंदर सेतू इसी तरह सहज़ही श्रीहनुमानजी बाँधते हैं ऐसी भावना है। “जो कोई भी श्रीहनुमानजी के आकृतिबंध पर रामनाम लिखेगा उसका नाम शतगुणा बढ़ जाएगा” और ऐसी ही रचना हमारे इस रामनाम बही की है।

 

Raamnaam Book

 

अंजनामाता बही की जानकारी और महत्त्व :

सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूजी के संकल्पानुसार विशिष्ट रचनावाली, श्रीवरदा चण्डिका प्रसन्नोत्सव में सिद्ध की गई, ऐसी यह ‘अंजनामाता’ बही है। माता अजंनी का पुत्र अर्थात महाप्राण हनुमानजी, जो बड़े पुत्र हैं अर्थात सद्‌गुरु श्रीदत्तात्रेयजी। एकमेव ‘हनुमानजी’ ही ऐसे हैं, जिन्होंने ‘स्वाहा’ (पूर्ण समर्पण) और ‘स्वधा’ (पूर्ण स्वावलंबन, स्वयंपूर्णता) इन दोनों गुणों को धारण किया है। यह गुण प्राप्त कर सके ऐसी रचना इस बही में की गयी है।

 

AniruddhaFoundation-Anjanamata vahi

बही लिखने का महत्त्व बापूजी के शब्दों में :

जब मैं रामनाम का उच्चारण करता हूँ, तो वह रामनाम अपने आप हनुमानजी के उच्चारण में समा जाता है।

कुछ विशिष्ठ अवसर के निमित्त जन्मदिन, शादी इत्यादि के निमित्त अपने आप्तों के सुख और समृद्धी के लिये उनके नाम से वही लिखकर  जमा कर सकते हैं। मृत व्यक्ति की आत्मा को रामनाम के कारण अगली गति अच्छी मिलती है ऐसी श्रद्धा है।

रामनाम बही लिखने से हमारे हाथों नवविधा भक्ति की श्रेष्ठ ‘श्रवण’ भक्ति होती है, क्योंकि रामनाम लिखने से आँखों से पढ़ा जाएगा। जप मन से उच्चार किया जाएगा और उसी समय उसका सहज श्रवण होगा। इसीलिए रामनाम बही अर्थात सहज भक्ति करने का पवित्र साधन है।

अंजनामाता की बही भी मुझे जीवन में बहुत मन:सामर्थ्य देती है। जिस क्षण हमें ऐसा लगता है कि हमारा मन अपने आपको कमजोर समझने लगता है, हमें डर लगने लगता है, उस क्षण अंजनामाता की और उनके पुत्र की शरण में जाने पर हम निर्भय होते हैं। अंजनामाता बही लिखने से स्वधा शक्ति का स्त्रोत सद्‌गुरु की कृपा से अखंड रूप से शुरु हो जाता है।

सभासदत्व कैसे ले सकते हैं? और शाखा :

‘रामनाम’ ही इस अनोखे बैंक का चलन है। कम से कम एक बही लिखकर उसे जमा करने पर इस रामनाम बैंक का सभासद बन सकते हैं। सभासद बनने पर प्रत्येक श्रद्धावान को एक पासबुक दी जाती है।

 

Ramnam-Jap-Hindi-Sep-2017