परमपूज्य सद्गुरु श्री अनिरूद्ध बापू के अनुभव कई श्रद्धावानों को प्राप्त होतें हैं। श्रद्धावान अपनी इच्छा से वह अनुभव लिखकर संस्था में भेजतें हैं। पहले वे अनुभव अनिरुद्ध विशेषांक में छपकर आतें थे और हर साल दत्तजयंती के दिन अनिरुद्ध विशेषांक का प्रकाशन होता था। दिनबदिन अनुभव बढ़ते ही गए और फिर “अनिरुद्ध विशेषांक” के बदले हर महिने प्रकाशित किए जानेवाले “कृपासिंधु” मासिक में श्रद्धावानों के अनुभव प्रकाशित होने लगे।

श्री दत्तगुरु पब्लिकेशन का ’कृपासिंधु’ यह मासिक मराठी, गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी इन भाषाओं में उपलब्ध हैं।  मराठी अंक हर मास में, गुजराती हर दो महीनों के बाद, और हिंदी और अंग्रेजी (इंग्लिश) हर तीन महिनों के बाद प्रकाशित होतें हैं।

कृपासिंधु मासिक की विशेषता

सत्य, प्रेम और आनंद इन परमेश्वरी तत्वों पर आधारित यह एकमेव मासिक है। इस मिट्टी में पैदा हुए संतों ने सत्पुरुषों ने विरासत से प्राप्त इस धरोहर का जतन किया (संरक्षित किया), उसे बढ़ाया, और आगे की पिढी को सौंप दिया। सही मायनों में यही अपनी संपत्ति है।

कृपासिंधु पिछले अनेक सालों से अपनी इसी धरोहर रूपी भक्ति-सेवा का ध्वज  हम सब तक पहुंचा रहा हैं । आज तक कृपासिधु से विविध विषयों पर लेख प्रकाशित हुए हैं। उदाहरण के तौर पर जिनकी वीरता, पराक्रम,  भक्ति के भक्कम बलबूते पर खिले थे ऐसे महान शूरवीर महाराणा प्रताप, गुरुगोबिंदसिंहजी, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, छत्रपति शिवाजी महाराज, कित्तुर की रानी चेन्नम्मा। साथ ही कालक्रम के अनुसार अनेक संतों की कथाएँ चरित्र और नए नए शास्त्रीय शोध संबंधित लेख भी उपलब्ध किए जातें हैं।

अपनी यही वीरता, भक्ति और परमेश्वरपर विश्वास की धरोहर को भारत के कोने-कोने तक पहुंचाना हैं। इसी उद्देश्य से कृपासिंधु में प्रमुख  तौर पर आद्यपिपा और अन्य भक्तों के वात्सल्यपूर्ण भक्ति के अभंगों का निरूपण, परमपूज्य अनिरूध्द बापू के कार्य के बारे में जानकारी,  उन्होंने बनाई संस्था के द्वारा आयोजित होनेवाले विविध उपक्रम, बापू के मार्गदर्शक तत्त्व, बापू की भक्ति और सेवा कार्य में सम्मिलित होने के पश्चात बापू के श्रध्दावान मित्रों को प्राप्त हुए सुंदर अनुभव, उनके जिंदगी में हुए सकारात्मक बदलाव, इन पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इन अनुभवों के सिवाय दूसरे कई विशेष लेखों का भी समावेश इस मासिक में किया जाता है।

आज हर एक आदमी, पूरा समाज, पूरा राष्ट्र, और पूरा विश्व ऐसी एक दहलीज पर खडा है कि जहां पर समाज के लिए, मानवता के लिए कुछ अच्छा, भला करने की, अपने हाथों से कोई सत्कर्म करने की चाहत हर किसी में है। किंतु उचित दिशा और मार्गदर्शन के अभाव से हर एक आदमी बौखला गया है कि किसकी उंगली थाम लेनी चाहिए, विश्वास रखें तो किस पर, भरोसा करें तो किस का ? ऐसे हर एक आदमी के लिए कृपासिंधु एक दिपस्तंभ की तरह कार्य करता है, परमपूज्य अनिरूध्द बापू के मार्गदर्शक तत्त्वों के अनुसार हर एक का आयुष्य  सार्थ बनाने के लिए , उस के (कृपासिंधु मासिक के) हर एक वाचक को उचित दिशा और मार्ग दिखलाने के लिए।

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