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भारतीय संस्कृति में होनेवाली सांघिक उपासना का स्थान :

सांघिक उपासना की सुंदर संकल्पना को पुनरुज्जीवित करने के उद्देश्य से सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूने अनेक स्थानों पर अनेकों उपासना केन्द्रों की स्थापना की दुनिया के कोने-कोने में विविध स्थानों पर उपासना केन्द्रों के माध्यम से भक्तिमय वातावरण निर्माण कर, आज उनमें अनिरुद्ध बापूद्वारा दिए गए सांघिक उपासना श्रद्धावान करते हैं।

सांघिक उपासना का महत्त्व :

इस सांघिक उपासना से जो तेज निकलता हैं, जो स्पंदन उत्पन्न होते हैं वे हमारे देह के लिए ही नहीं बल्कि हमारे लिए भी उपकारी साबित होते हैं। सांघिक प्रार्थना से हमारा पुण्य विभाजित (डिव्हाईड) नहीं होता है। बल्कि वह बढ़ता ही है! नॉन जॉमेट्रिकल पद्धतिनुसार बढ़ता है।

सांघिक उपासना का लाभ :

१) सांघिक उपासना से सकारात्मक उर्जा की वृद्धि होती है।

२) भारत में उद्यमशील व्यक्तित्व के काफी लोग हुए फिर भी समाज मात्र पिछड़ाही रहा कारण हममें सांघिक भावना की कमी थी। यह सांघिक भावना सांघिक उपासना से ही उत्पन्न की जा सकती है।

३) समाज सेवा करते समय जो अहंकार निर्माण हो सकता है वह भक्तिमार्ग में संघभावना में सहसा नहीं आता है।

४) सांघिक उपासना द्वारा हमें मानसिक शांति तो प्राप्त होती ही है अपितु सांसारिक समस्याओं से भी मुक्ति मिलती है और हमारा मन:सामर्थ्य बढ़कर हम परमेश्वरी मार्ग के हमेशा के प्रवासी बन जाते हैं।

५) सांघिक उपासना से एकाग्रता में वृद्धि होती है।

६) सांघिक उपासना से समाज में एकता एवं समानता की भावना विकसित होती है।

७) मानसिक शक्ति का विकास होता है और व्यक्ति भयमुक्त जीवन व्यतीत कर सकता है। इससे हर एक व्यक्ति, समाज एवं राष्ट्र का भी अध्यात्मिक एवं भावनात्मक विकास होता है।

श्रीहरिगुरुग्राम में की जानेवाली सांघिक उपासना :

हर गुरुवार को श्रीहरिगुरुग्राम (न्यू इंग्लिश स्कूल, बांदरा) यहाँ पर काफी बड़े पैमाने पर सांघिक उपासना की जाती है।

उपस्थित श्रद्धावानों को परमपूज्य बापूजी के पितृवचन का लाभ भी प्राप्त होता है साथ ही उनके दर्शन का, कृपाशीर्वाद का, कृपादृष्टि प्राप्त करने का सुअवसर भी प्राप्त होता है। इसीलिए श्रद्धावानों के मुख से यही शब्द उच्चारित हो उठते हैं।

घरघर में एवं पारिवारिक सांघिक उपासना :

किसी भी श्रद्धावान के घर किसी ना किसी कारण वश एकत्रित जमा होनेवाले श्रद्धावान जैसे रिश्तेदार, पासपड़ोस, मित्र-सखा आदि मिलकर भी सांघिक उपासना कर सकते हैं। सच्चिदानंद पादुका पूजन समारोह यह एक उत्तम माध्यम सांघिक उपासना हेतु मुक्त कर रखा है। सावन, मार्गशीर्ष जैसे महीनों में परमपूज्य अनिरुद्ध बापू ने स्तोत्र पठन दिया है। चैत्र नवरात्रि, अश्विन नवरात्रि जैसे महत्त्वपूर्ण पवित्र समय के दौरान पूजा-पाठ, नामस्मरण, जप, स्तोत्र पठन जैसी सामूहिक उपासना श्रद्धावान भक्त एकसाथ मिलकर कर सकते हैं।

संस्था की ओर से मनाये जानेवाले विविध उत्सवों में सांघिक पठन का आयोजन किया गया होता है।

सावन महीने में संघिक घोरकष्टोद्धरण मंत्र पठन उसी तरह गुरुक्षेत्रम्‌ में साल में एक बार सांघिक हनुमानचलीसा पठन पूरे सप्ताह श्रद्धावानों के लिए चलता ही रहता है।

ऑनलाईन अनिरुद्ध डॉट टी.वी. :

२०१४ से गणपती उत्सव का अनिरुद्ध टी.वी. का प्रक्षेपण शुरु हुआ। (www.aniruddha.tv) नामक वेबसाईट से अंग्रेजी सांघिक उपासना का प्रक्षेपण हर रविवार सुबह १०.३० से ११.३० के दरमियान किया जाता है तथा श्रद्धावान ऑनलाईन इस उपासना का लाभ उठा सकते हैं।

परमपूज्य सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू श्रद्धावानों से कहते हैं कि “रामरक्षा, हनुमानचलीसा, पंचमुख हनुमत्कवच मंत्र, घोरकष्टोद्धरण स्तोत्र, जैसे आध्यात्मिक सांघिक स्तोत्र पठन ही तुम्हारा यज्ञ यही तुम्हारा दान एवं यही तुम्हारी तपश्चर्या है। यज्ञेन-दानेन-तपसा!

यह सांघिक उपासना ही तुम्हारे दुष्रारब्ध का नाश करनेवाली साबित होगी साथ ही तुम्हारा यह आनंद ही मुझे भी आनंद प्रदान करनेवाली साबित होगा। यह जरूर होगा!