AniruddhaFoundation-Thursday Pitruvachanam

१९९६ में परमपूज्य सदगुरु बापू ने सिर्फ गिने चुने श्रध्दावानों के सामने अपने घर पर प्रवचन की शुरुवात की थी। जैसे जैसे श्रध्दावानों की संख्या बढ़ते गयी वैसे स्वामी समर्थ व्यायाम शाला, अ‍ॅन्टोनी डिसिल्व्हा हायस्कूल, और २००२ साल से न्यू इंग्लिश स्कूल, खेरवाड़ी (बांद्रा) अभी जिसे श्रीहरिगुरुग्राम कहतें हैं वहां पर हर गुरुवार शाम ७.३० उपासना, प्रवचन (पितृवचन) होतें हैं।

१९९६ से २०१७ तक कुल मिलाकर इन २१ वर्षों में सदगुरु परमपूज्य बापू ने आध्यात्मिक प्रवचन किये पर साथ ही में अध्यात्म और विज्ञान का एक दूजे के साथ कितना अटूट संबंध है इस के बारे में भी श्रध्दावानों को मार्गदर्शन किया। प्रमुख तौर पर सदगुरु श्रीआनिरुध्द बापू ने उनके प्रवचन में जिन विषयों को सम्मिलित किया वे हैं – साईनाथ के ग्यारह वचन (मराठी), श्रीविष्णुसहस्त्रनाम, रामरक्षा, ललितासहस्त्रनाम, राधासहस्त्रनाम, आराधनाज्योति इन स्तोत्रों, जपों एवं मंत्रों के संग्रहवाली पुस्तिका के विविध श्लोकों का स्पष्टीकरण आदि.

पितृवचन

परमपूज्य बापू ने ‘पितृवचन’ के अंतर्गत बालसंगोपन, परिवार का महत्व, व्यक्ति -व्यक्तियों के बीच का सुसंवाद, ऐसे विविध पहलूओं पर चर्चा की।

पालकों की जिम्मेदारी, पालकों का कर्तव्य कैसे निभाना चाहिए? पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारी कैसी निभानी होती है? वैसे ही मातृभूमि के लिए और संपूर्ण मानवजाति के लिए कर्तव्य कैसे पूरे करनें हैं? इन के बारे में उनका मार्गदर्शन बहुत ही मूल्यवान होता है। उनका प्रवचन यानि सत्य, प्रेम और आनंद का सुंदर मिलाप! श्रीहरिगुरुग्राम इस प्रवचन स्थल पर आये हुए हर श्रध्दावान को उस प्रेम की शक्ति का, पूर्ण सत्य की और निरामय आनंद की अनुभुति जरूर होती ही है। प्रवचन को आते समय उनके मन में समस्या लेकर आए हुए श्रद्धावानों को प्रवचन के दौरान अपनी-अपनी समस्याओं को हल करने का मार्ग अवश्य ही मिल जाता है और उसकी पीड़ा भी दूर हो जाती है ऐसा कई लोगों का अनुभव हैं।

विज्ञानसंबंधित प्रवचन

सद्‍गुरु बापू कहतें हैं कि, ‘विज्ञान और अध्यात्म परस्परविरोधी नहीं है बल्कि वे एक दूसरे के परस्परपूरक ही हैं। मानव विज्ञान के साथ भक्ती का उचित मिलाप करके परमेश्वरी मार्ग से स्वयं के साथ दूसरों का विकास भी कर सकता है।’ इसिलिए उपर निर्देशित प्रवचनों के अलावा गुरुवार के प्रवचन में परमपूज्य सदगुरु बापू और भी दूसरें महत्त्वपूर्ण विषयों के बारे में अपने विचार और मत स्पष्ट रूप में सामने रखतें हैं। उदाहरण – जागतिक स्तरपर अपना मत जाहिर करते है। उदा.- नॅनोटेक्नॉलॉजी, स्वार्म इंटेलिजन्स, होलोग्राम, हार्प तकनीकी ज्ञान, तृतीय महायुध्द।

कुछ विशेष प्रवचन

सद्‌गुरु बापूने सखोल अभ्यास एवं संशोधन करके राष्ट्रीय और सामाजिक हित की दृष्टीकोन से निश्चित विकास लानेवाली १३ कलमी योजना, आपत्ती व्यसस्थापन, रामराज्य ऐसे विषयों पर भी कुछ विशेष प्रवचन किये हैं।

सद्‍गुरु अनिरुध्द बापू श्रध्दावानों का प्रबोधन गुरुवार के प्रवचन द्वारा करतें हैं और उसके द्वारा वैचारिक और गुणात्मक ‘उत्क्रांति’ करवा लेतें हैं। और यह सब एकदम Clean, Clearcut और Precise ऐसे ही होतें हैं। Common interest of common man यही सिध्दांत उसके पीछे होता है। ‘पावित्र्य यही प्रमाण’ यह तत्त्व तो अध्याहृत होता ही है।