AniruddhaFoundation-Shree Avadhoot Chintan

उध्दरेत्त्मना आत्मानं।

अपना उद्धार मुझे स्वयं ही करना होता है। अपने आस-पास की परिस्थिती को बदलने के लिए सर्वप्रथम मुझे स्वयं अपने आप को ही बदलना पडता है। परन्तु इसके लिए आवश्यकता होती है, मेरी भक्ति एवं सद्गुरु के संकल्प की और इसी संकल्प के अन्तर्गत आनेवाला एक संकल्प हैं, ‘अवधूतचिंतन’।

अवधूतचिंतन अर्थात क्या?

‘श्रीअवधूतचिंतन’ यह बिल्कुल क्वचित ही घटित होनेवाली घटना थी। अतिशय विलक्षण, अद्भुत एवं मनमोहक प्रकार का इसका स्वरूप था। श्री दत्तयाग नियतिचक्र परिवर्तन प्रदक्षिणा, सर्वतोभद्र कुंभयात्रा एवं कैलाशभद्र महापूजन ये सभी बातें एकत्रित तरीके से, अर्थात ‘अवधूत चिंतन’।

चार रसयात्रा एवं एक भावयात्रा, धर्मचक्र की स्थापना, व्यंकटेश, जगन्नाथ, गायत्री उत्सव, गुरुक्षेत्रम्‌ की स्थापना एवं आराधना ज्योति उपासना एक विशिष्ठ क्रमानुसार पूर्ण होती गई, उसके पश्‍चात्‌ ही यह अवधूतचिंतन उत्सव शुरु हुआ।

श्री अवधूत दत्तात्रेयजी के २४ गुरुओं, में इस विश्‍व के ऐसे २४ तत्व हैं जो उन महाविष्णु की, परमशिव की, सद्गुरु दत्तात्रेय की कृपा प्राप्त करनेवाले ये चौबीस चैनल्स हैं। इन २४ गुरुओं का महत्त्व इस श्री अवधूतचिंतन उत्सव के माध्यम से श्रद्धावानों तक पहुंचाया गया था। इतना ही नही बल्कि, इन गुरुओं की ओर से हमें क्या स्वीकार करना हैं और किस चीज का त्याग करना है। इस बात की सीख भी प्राप्त हुई थी।

श्रीअवधूतचिंतन उत्सव का महत्त्वपूर्ण पहलू अर्थात श्री दत्तयाग, नियतीचक्रपरिवर्तन प्रदक्षिणा, सर्वतोभद्र कुंभयात्रा, एवं कैलाशभद्र महापूजन। सभी श्रद्धावानों कों इन चारों उपासनाओं में मुक्तरुप से सहभागी होने का अवसर प्राप्त हुआ था। सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू भी सभी श्रद्धावानोंसहित इस उत्सव में एवं इन चारो ही उपासनाओं में सहपरिवार सहभागी हुए थे।

श्री दत्तयाग

श्रीदत्तयाग से शरीर, मन, बुद्धि एवं प्राण को सुरक्षाकवच प्राप्त हुआ। तीन दिनों तक चलनेवाला यह दत्तयाग कोई सामान्य होमहवन अथवा यज्ञ नहीं था। बल्कि यह एक अत्यन्त ही सुंदर घटना थी। इस यज्ञ के लिए पिछले तीन वर्षों से कुल मिलाकर ग्यारह लोग अनुष्ठान कर रहे थे। उन लोगों का यह विशिष्ठ अनुष्ठान विशिष्ठ समय पर आकर पूर्ण हो गया और इसीलिये यह दत्तयाग किया गया था, पूर्णशुद्ध उर्जायुक्त वैदिक मंत्रोद्वारा यह दत्तयाग किया गया था। इससे प्राप्त होनेवाला पुण्यफल हर एक श्रद्धावान को प्राप्त हुआ है।

वैसे ही इस दत्तयाग का पुण्यफल अर्थात ‘धन्य धन्य प्रदक्षिणा’ विलक्षण प्रदक्षिणा अर्थात नियतिचक्रपरिवर्तन प्रदक्षिणा, जो हर एक श्रद्धावान को उसे ग्रसित करनेवाले रोगजन्तु और संरक्षण करनेवाली रोगप्रतिबंधक लस (टीका) प्राप्त करके देनेवाली थी।

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नियतिचक्रपरिवर्तन प्रदक्षिणा

                  

इस उत्सव में नियतीचक्र परिवर्तन प्रदक्षिणा से लोगों को २४ चैनल्स पर २४ प्रक्रिया करके जो चैनल्स हमें दु:खदायक, क्लेशकारक साबित होनेवाले रहते हैं । उन्हें इस प्रदक्षिणा के माध्यम से शुद्ध करनेवाली रोगनिवारक लस (टीका)। नियतिचक्र में हर एक मनुष्य फँसा रहता है। हर मनुष्य की नियती भी अलग ही होतीहै। वह उनके देह से उनके प्रभामंडल के साथ (ऑरा के साथ) संबंधित होती है।

मेरे स्व-नियतीचक्र का परिवर्तन करने की जिम्मेदारी, सामर्थ्य, क्षमता, कर्तुत्व मुझमें ही है। मेरी नियती एवं उसके पश्‍चात मेरे आस-पास की परिस्थिती मैं जरूर बदल सकता हूं। मैं अपने नियतीचक्र से मुकाबला कर सकता हूं, परन्तु इसके लिए मेरा अपने भगवन पर प्रचंड विश्‍वास होना पड़ता है। इस नियती चक्र को बदलने की ताकत मुझे इस प्रदक्षिणा से प्राप्त हुई। इसीलिए इसका नाम है ‘नियतीचक्रपरिवर्तन प्रदक्षिणा’’।

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श्री सर्वतोभद्र कुंभयात्रा’

सर्वतोभद्र कुंभयात्रा अर्थात सर्वतोपरी कल्याणकारी यात्रा। भारतवासियों के मन में हजारो वर्षों से एक अत्यन्त सुंदर ध्येय सँजोकर रखा गया होता है और वह ‘सर्वतोभद्र कुंभयात्रा’ अर्थात काशी में जाकर वहाँ पर गंगा का जल कावड में भरकर रामेश्‍वरम में जाकर वहाँ पर श्रीराम के लिंग पर अभिषेक करना और रामेश्‍वरम के पास होने वाली कन्याकुमारी का जल अर्थात तीनो समूह एक स्थान पर आकर मिलते ही उस स्थान से लाकर पुन: काशीविश्‍वेशवर को अर्पण करना। इस यात्रा को ‘श्री सर्वतोभद्र कुंभयात्रा’ कहते हैं।

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‘श्रीद्वादश ज्योतिर्लिंग कैलाशभद्र महापूजन’

श्रीद्वादश ज्योतिर्लिंग कैलाशभद्र महापूजन अर्थात बारह ज्योतिर्लिंगों का महापूजन श्रद्धावानोंने किया। ऐसे इस बारह ज्योतिर्लिंगो का पूजन करने से श्रद्धावानों को उनके अंदर होने वाली बुरी बातों का विनाश प्रलय करने के लिए एवं अच्छे , शुभ, हितकारक बातों का प्रतिपालन करने का अवसर प्राप्त हुआ। जीवन का विकास करनेवाली बातों का विकास करना एवं बुरी प्रवृत्तियों का लय करना यह शिवशक्ति प्राप्त करने का अवसर इस द्वादश ज्योतिर्लिंग कैलाशभद्र महापूजनसे श्रद्धावानों को प्राप्त हुआ।

नव-अंकुर-ऐश्वर्य प्राप्तिका श्रीअवधूतचिंतन उत्सव

इस उत्सव के माध्यम से श्रद्धावानों को उपलब्ध होनेवाली ये चतुर्विध बातें हमारे सभी प्र्यासों को सद्गुरुतत्व का बल प्राप्त करवाते हुए हमारे जीवन को सुखी, समृद्ध, समाधानकारक, आनंदमयी करनेवाली चार सीढियाँ थी (चतुर्वर्ग उपासना) ऐसा था यह अनोखा श्री अवधूतच्चिंतन उत्सव जो दिनांक ५ मई २००९ से दिनांक ९ मई २००९ तक सात दिनों तक श्रीहरिगुरुग्राम में मनाया गया था।

नौ अंकुर ऐश्‍वर्य श्रद्धावानों को प्राप्त हो इसके लिए श्री अनिरुद्ध के प्रयासों से श्रीअवधूतचिंतन उत्सव साकार हुआ।