AniruddhaFoundation-Shree Sadguru Punya Kshetram

 

सन्‌ २००५ के फरवरी महीने में सद्‌गुरु श्रीबापूजी ने श्रीहरिगुरुग्राम के प्रवचन में पुण्यक्षत्रेम्‌ की स्थापना के बारे में उद्‌घोषणा की थी। श्रीसद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ जलगाँव जिला के अमलनेर तालुका के नीम इस गाँव के पास पाझंरा नदी और तापी नदी के मध्य में बसा है। भौगोलिक दृष्टि से यह स्थान लगभग ४८ एकड़ जमीन पर फैला हुआ है।

सद्‌गुरु बापूजी ने पुण्यक्षेत्रम्‌ इस स्थान पर उनके मानवीय सद्‌गुरु श्रीविद्यामकरंद गोपीनाथ शास्त्री पाध्ये इनके तपोस्थल में स्थित तापी नदी के किनारे की शिला और पांझरा नदी के किनारेवाली पहाड़ी का सद्‌गुरु बापूजीने इस स्थान का महात्म्य विशद किया।

पांझरा नदी और तापी नदी के किनारे स्थित, यह भूमि अतिशय पवित्र है। पुरातन काल से ही इसी भूमि पर अनेक ऋषि मुनियों ने तपस्या की है। प्रत्यक्ष के अग्रलेख में भी सद्‌गुरु अनिरुद्ध बापूजीने इस स्थान का उल्लेख किया था ऐसी यह पवित्र भूमि अर्थात श्रीसद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌।

इसी पवित्रभूमि पर गोपीनाथशास्त्री पाध्ये इनका तपोस्थल है। और यही वर्धमान व्रताधिराज का निर्माण स्थल है। वर्धमान व्रताधिराज की शुरुआत गोपीनाथशास्त्री पाध्येजी ने इसी भूमि पर की थी और सहस्त्रावर्तन के बाद बापूजीने यह व्रत सन्‌ २००५ में सबके लिए शुरु किया। व्रताधिराज के दौरान श्रद्धावान श्रीसद्‌गुरु पुण्यक्षेत्रम्‌ में किसी भी दिन इस पवित्र पहाड़ी पर बैठकर, पवित्र शिला पर बैठकर अपने व्रतपुष्प का पठन कर सकते हैं। तथा अनेक उपासना केंद्रों के श्रद्धावान इस स्थानपर जाकर पूरे दिन श्रमदान की सेवा भी करते हैं।

गुरुक्षेत्रम्‌ के दत्तगुरु की तस्वीर का इतिहास भी यहीं का है। श्रद्धावानों इस तस्वीर का दर्शन  श्रीगुरुक्षेत्रम्‌ – खार यहाँ पर ले सकते हैं।