AniruddhaFoundation-The Third World War

Third World War‘शांति का बुरखा ओढ़े तृतीय महायुद्ध की डाकीन (राक्षसी) दरवाजा खटखटा रही हैं।’ यह वाक्य किसी भी फिल्म अथवा नाटक का डायलॉग नहीं है, बल्कि आज के युग की चल रही स्थिति का यह वास्तविक उदाहरण है।

११ सितम्बर २००१ में होनेवाला अमरिका का हमला हो अथवा २६/११/२००८ के दिन मुंबई में होनेवाला हमला हो, संपूर्ण विश्व ने यह मान्य किया है कि आतंकवाद यह आज के समय में एक भयावह गंभीर समस्या बन चुका है।

पहले के समय में (प्राचीनकाल में) युद्ध केवल दो देशों के बीच सेना एवं युद्ध भूमि तक ही सीमित था। मात्र आज ट्रेन, टैक्सी, स्टेशन, दुकाने कहीं पर भी बॉम्बस्फोट, जैविक-रासायनिक हमलों आदि के कारण यह युद्ध सामान्य मानवों के घर तक आ पहुँचा है।

मात्र एक सत्य का स्वीकार हमें करना ही पड़ेगा कि युद्ध का परिणाम मात्र १००% सामान्य जनता को ही भुगतना पड़ता है और इसका सामना भी उन्हें ही करना पड़ता है।

इसीलिए इस आक्रमक एवं हिंसक काल का सामना करने के लिए सामान्य लोगों को सामान्य भाषा में ही समझना पड़ता है। इसीलिए काल की ज़रूरत को ध्यान में रखते हुए डॉ.अनिरुद्ध धैर्यधर जोशी एम.डी. ह्युमटिलॉजिस्ट एवं दैनिक ‘प्रत्यक्ष कार्यकारी संपादक’ इन्होंने स्वयं सन २००५ में ‘तृतीय महायुद्ध’ इस विषय पर लेखमाला लिखी। आगे चलकर अपने पाठक मित्रों के आग्रह की ही खातिर राष्ट्रीय एवं अन्तर-राष्ट्रीय मुद्दों को ऍड करके इस लेखमाला को संचलित करके सन २००६ में ‘तृतीय महायुद्ध’ नामक पुस्तिका प्रकाशित हुई।

१)इस पुस्तिका की आवश्यकता क्यों?

पिछली शताब्दी में संपूर्ण विश्व को दहला देनेवाले दो महायुद्ध हुए। इन दोनों महायुद्धों पर यदि गौर करते हैं तो तृतीय महायुद्ध की सद्यस्थिति का अहसास अपने आप ही हो जाता है। इन दो महायुद्धों ने तो जैसे समूचे विश्व का ही आकार-प्रकार सर्वत्र ही बदल दिया है। आज पुन: एक बार यह संपूर्ण विश्व तृतीय महायुद्ध की दिशा में तीव्रगति के साथ प्रवास कर रहा है।

२)तृतीय महायुद्ध के महत्त्वपूर्ण देश :

संपूर्ण विश्व के लिए भी (विशेषत: अमरीका के लिए) तकलीफदायी साबित हो सकनेवाला एक भयप्रद ‘त्रिकूट’ जन्म ले चुका है। चीन, पाकिस्तान एवं नॉर्थ कोरिया, बदलते हुए जागतिक समीकरणों के कारण इन तीनों ही राष्ट्रों का राजकीय एवं आर्थिक हितसंबंध काफी हदतक एक ही दिशा में प्रवास करनेवाले हैं।

इस अभदर त्रिकूट को चौथा साथीदार मिलते ही ये संपूर्ण विश्व को युद्ध की खायी में खींच लेगा (धकेलने की तैयारी में हैं) और यह चौथा भागीदार ईरान, रूस अथवा सिरिया हो सकता है। स्वयं के राक्षसी महत्त्वकांक्षाओं को साकार करने के लिए चीन दुनिया के सबसे बड़े दो धर्मों के बीच मनमुटाव पैदा करके तृतीय महायुद्ध धर्मयुद्ध के नाम पर लड़ाने के की कोशिश में है और सबसे अधिक लक्षणीय बात तो यह है कि चीन में इन दोनों ही पक्षों का अस्तित्व बिलकुल ही नगण्य है।
पाकिस्तान यह चीन की गोद ली हुई औलाद तृतीय महायुद्ध के प्रथमार्ध रणनीति का रचयिता है। इस देश में ही निर्माण होनेवाला एक लड़ाकू नेतृत्त्व तृतीय महायुद्ध को वेग, धोखा एवं दिशा देनेवाला है। संक्षेप में कहें तो पाकिस्तान जागतिक दुर्भाग्य का दूत है।

३)तृतीय महायुद्ध के महत्त्वपूर्ण व्यक्तिमत्व :

ओसामा बिन लादेन-अल कायदा, डॉ.अलमान-अल-जवाहिरी, अबू मुसब अल झराकी, श्रीमति कॉन्डोलिझा राईस, धर्मगुरु पोप बेनेडीक्ट (१६वे), सद्दाम हुसेन, एन्जेला मर्केल।

इन सब के संबंध में अत्यन्त महत्त्वपूर्ण जानकारी एवं इनके संबंध में घटित होनेवाली अग्रीम घटनाएँ हमें पढ़ने के लिए उपलब्ध है (मिलती है)।

४)युद्ध के प्रकार :

तृतीय महायुद्ध के अन्तर्गत आनेवाले आधुनिक शस्त्रों का उपयोग निम्नप्रकार से किया जायेगा।

१)आण्विक शस्त्रास्त्र, २)क्षेपणास्त्र (मिसाईल्स), ३)रासायनिकयुद्ध, ४)जैविकयुद्ध, ५)सागरीयुद्ध, ६)आकाल(सूखा) ले आनेवाला युद्ध, ७)अंतरिक्षयुद्ध, ८)गुरिल्ला युद्धतकनिक एवं ९)मानसिक दबाव युद्ध तकनीक।

गुरिल्ला युद्धतकनिक – तृतीय महायुद्ध में यह गुरिल्ला युद्धतकनीक अत्यन्त व्यापक प्रमाण पर उपयोग में लाये जाने की संभावना को नकारा नहीं जा सकता है।

५)सामान्य मनुष्यों को सतर्क रहने योग्य :

अज्ञान के कारण ही ये दुष्परिणाम घटित होते हैं वहीं विज्ञान एवं जानकारी से अनेक दुष्परिणाम सहज ही ताले जा सकते हैं। सामान्य नागरिकों को कैसा आचरण करना चाहिए आखिर उन्हें करना क्या हैं? इसका प्रशिक्षण Aniruddha’s Acadamy of Disaster Management  द्वारा दिया ही जा रहा है।

६)महाभारत :

तृतीय महायुद्ध के पश्चात्‌ बचे हुए विश्व को सभी प्रकार से तारने का तथा उसके पुनर्वसन का कार्य शायद नियती ने भारत के ही कुंडली में लिखा है। इसका कारण यह है कि भारत की प्राचीन संस्कृति अहिंसा एवं सहिष्णुता इन मूल्यों को साथ लेकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा और यह भारतीय संस्कृति का कर्तव्य ही होगा।

७)लेखक के प्रति :

इस पुस्तक में दर्ज़ की गई घटनाओं की प्रचिती :

डॉ.अनिरुद्ध जोशीजी द्वारा २००६ में लिखी हुई इस पुस्तक में से अनेक घटनाओं एवं पिछले कई सालों से घटित होती चली आ रहीं थी तथा आज की सदय जागतिक रंगमंच पर घटित होनेवाली घटनाओं की ओर गौर करके एक जागरूक पाठक इस का अंदाजा भलीभाँति लगा सकता है।

आज हम देखते हैं कि अमरिकी काँग्रेस सदस्य फ्रँक उल्फ, इस्त्रायल के संरक्षणमंत्री मोशेयालॉन, जॉर्डन किंग, अब्दुल्ल बिन हुसेन जैसे दुनिया के कुछ नेताओं ने अनेक वेबसाईट्‌स एवं वृत्तपत्रों ने तृतीय महायुद्ध शुरु हो चुका है यह राय प्रस्तुत की है। स्वयं पोप फ्रान्सिस ने ‘फिलहाल दुनिया भर में तृतीय महायुद्ध शुरु हो चुका है’ ऐसा कहा है।

चीन, पाकिस्तान एवं उत्तर कोरिया इन तीनों से दुनिया को होनेवाले धोखे को डॉ.अनिरुद्ध जोशी ने स्पष्टरूप में प्रस्तुत किया है। और आज साऊथ चायना की सीमा में चीन की चल रही दादागिरी, उत्तर कोरिया की आक्रमक हलचल तथा आतंकवाद का नंदनवन बन चुका पाकिस्तान यह है आज की परिस्थिती इसे देखते हुए इस पुस्तक में प्रस्तुत किए गए निष्कर्ष कितने अचूक हैं, यह दुनिया के समक्ष आ चुका है।

डॉ. अनिरुद्ध जोशी द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार यह दुनिया ध्रुवीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है और इससे दुनियाभर में काफ़ी बड़े पैमाने पर उत्पात मचा हुआ है।

८)बदलते हुए पैमाने (समीकरण) एवं सामान्य मनुष्य

९)पुस्तक से बाहरी लोगों का रिव्यूज

१०)प्रत्यक्ष समाचार पत्र के साथ संलग्नता –

तृतीय महायुद्ध के कारण दुनियाभर में घटित हो रहीं घटनाओं की जानकारी प्रत्यक्ष के पाठकों तक पहुँचाने हेतु डॉ.अनिरुद्ध जोशी ने दैनिक प्रत्यक्ष के रोज की प्रति में तीन पृष्ठ इसी विषय से संबंधित रखा है। उनका कहना है, आस-पास में घटित होनेवाले वास्तविक सच्चाई का ज्ञान न होना ही अंधकार है और घात अकसर अंधकार में ही होता है, हमारे जीवन से इस अंधकार को दूर करने का विशेष एवं विलक्षण कार्य प्रत्यक्ष के माध्यम से हो रहा है।