AniruddhaFoundation-Ahilya-Sangha

सालों से क्षीण होती चली गयी महिला-शक्ति को पुन: एक बार जागृत (जीवित) करने के लिए, परमपूज्य सदगुरु श्री अनिरूध्द बापू के मार्गदर्शन के अनुसार ३ अक्टूबर २००२ के दिन अहिल्या संघ की स्थापना हुई।

पुराण में बतलायी गयी अहिल्या जैसे युगों तक शिला बनकर जिंदगी गुजारने की नौबत किसी भी महिला पर न आए इसीलिए चलाया गया अभियान यानि ‘अहिल्या संघ’।

‘अहिल्या संघ’ यह कोई भी महिला-मुक्ति आंदोलन नहीं है, अपितु महिलाओंने अपनी अगाध शक्ति और सामर्थ्य को पहचानकर, उन्हें उसका इस्तेमाल (उपयोग) खुद के लिए, परिवार, समाज और देश के विकास के लिए करने आना चाहिए इसीलिए किया हुआ प्रयास है।

बलविद्याप्रशिक्षण :-

महिलाओं के लिए विविध क्षेत्रों में शिक्षा के मार्ग खुल जाने से, बहुत सी महिलाओं ने शिक्षा के लिए या अपने परिवार का आर्थिक तौर पर हाथ बंटाने के लिए घर से बाहर कदम रखा, किंतु आज भी वे सही मायनों में सुरक्षित नहीं हैं। रास्ते में, गाड़ी से सवारी करते हुए, कार्यालय में इतना ही नहीं तो कभी कभी अपने घर में ही उन्हें मानसिक और शारीरिक अत्याचारों का सामना करना पड़ता है।

किसी भी बिकट परिस्थिती का सामना महिलाओं को करते आना चाहिए इसीलिए महिलाओं को स्वयंनिर्भर, स्वसंरक्षित होना चाहिए और साथ ही उन्हें शरीर, मन और बुध्दि इन तीनों स्तरों पर सक्षम रहना भी अत्यंत आवश्यक है।

शरीर, मन व बुध्दि इन तीनों स्तरों पर सक्षम बनवाने के लिए, अहिल्या संघ कि ओर से ‘प्राच्यविद्या’ अथवा ‘बल- विद्या’ प्रशिक्षण उपक्रम का आयोजन किया जाता है। महिलाओं को किसी दूसरे से अपने संरक्षण की उम्मीद ना रखनी पड़े और खुद अपनी भी सुरक्षा करते आना चाहिए, साथ ही मुसीबत में घिरी दूसरी महिलाओं को भी सहायता करते आना चाहिए इस हेतु से यह प्रशिक्षण वर्ग (क्लास) का आयोजन किया गया है।

‘Defence is defeat, attack is defence’ यानि आक्रमण या धावा बोल देना यही बचाव का सूत्र हैं। इस ‘बलविद्या’ प्रशिक्षण में पूर्व प्राथमिक सूर्यनमस्कार, भिन्न- भिन्न व्यायाम के प्रकार, हस्तलाघव, हस्तकौशल्य, मुष्ठीलाघव, मुद्गलविद्या ऐसी अनेक प्राच्यविद्याओं को सम्मिलित किया गया है। यह प्रशिक्षण नि:शुल्क दिया जाता है। अब तक ‘बलविद्या’ प्रशिक्षण कि कुल इक्कीस (२१) बॅचेस हुई हैं और कुल १५२० महिलाओं ने इसका लाभ लिया है ।

‘अहिल्या संघ’ की तरफ से ‘सूर्यनमस्कार शिविर’ का भी आयोजन किया जाता है। अब तक अहिल्या संघने पूरे महाराष्ट्र में ३८ शिविरों का आयोजन किया गया है और उसकी २०६० महिलाएँ लाभार्थी हैं।

वृक्षारोपण सेवा :-

भगवान ने महिलाओं को वात्सल्य का नैसर्गिक उपहार भेंट स्वरूप दिया हैं। जितने प्यार से वे नन्हें शिशु का लालन-पालन कर सकती हैं उतने ही प्यार से वे वृक्षों का भी लालन-पालन और संवर्धन कर सकती हैं, इसीलिए जादा से जादा महिलाओं को सम्मिलित करके अहिल्या संघ द्वारा ‘वृक्षारोपण सेवा’ का भी आयोजन किया जाता है। अब तक अहिल्या संघ द्वारा १५१४ वृक्ष लगाये गये हैं।