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श्रीअनिरुध्द जोशीने १४ मार्च २००२ इस दिन ‘अनिरुद्धाज्‌अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझास्टर मॅनेजमेंट (ए‍एडीएम) इस संस्था की स्थापना की।

ए.ए.डी.एम. की कार्यवाही :

१४ फरवरी २००२ से २७ फरवरी २००२ इस दौरान १४ दिन की कार्यशाला का आयोजन यह एक सुनिश्चित दिशा की ओर बढाया हुआ यशस्वी कदम ही था।

चुने हुए कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण देकर, उनमें से भावी प्रशिक्षक तैयार करके, आपत्ति निवारण का महत्त्व समझा देना और संबंधित प्रशिक्षण संपूर्ण देश के नागरिकों को प्राप्त करवाना यह इस विशेष प्रशिक्षण का प्रमुख हेतु।

विविध उपक्रम –

  • बेसिक ट्रेनिंग कोर्स :

 

नैसर्गिक व मानवनिर्मित आपत्तियां कौनसी होती है, उनके कारण क्या होतें हैं, और उसमें से छुटकारा कैसे पाना हैं यह सब इस कोर्समें सिखाया जाता हैं। बचाव करने के लिए विविध बचाव पद्धति, अग्निशमन यंत्र, अग्निशमन के प्रकार, बँडेजेस, गाँठ के प्रकार (knots), घायल लोगों को उठाने की पद्धतियाँ (स्ट्रेचर्स), सी.पी.आर.(cardiopulmonary resuscitation या कार्डियो पल्मनरी रिससिटेशन मतलब हृदय फेफड़ों की क्रिया का पुनरुज्जीवन )आदि के शिक्षण की आवश्यकता होती है। प्रात्यक्षिक और सराव सत्र का भी आयोजन आवश्यक होता है
यह प्रशिक्षण विनामूल्य है।

पहले प्रशिक्षित बॅच के स्वयंसेवकोंने आगे की बॅचेस को प्रशिक्षण दिया और ऐसे ही तरीके से बहुत जगहों पर बहुत से ट्रेनर्स तैयार करके अब वे विविध जगहों पर इस कोर्स का आयोजन करतें हैं और उसी से प्रशिक्षण लिए हुए स्वयंसेवक DMV’s (डिझास्टर मॅनेजमेंट व्हॉलेंटियर्स) तैयार होतें हैं। अभी तक DMV’s की कुल संख्या ७०,८५५ हैं ।

  • कॉर्पोरेट सेक्टर ट्रेनिंग :

धुले (धुलिया) , नंदुरबार, के पुलिस महानिरिक्षक ने ऐसी प्रशिक्षण कार्यशाला लेने के लिए आमंत्रित किया था। उन के अनुसार दिनांक १० फरवरी २००८ के दिन पुलिस महानिरिक्षक, उपमहानिरिक्षक, अन्य ३८ अधिकारी और १५० पुलिस कार्यशाला में उपस्थित थे।

उस विभाग में और एक कार्यशाला ३ मई २००८ के दिन आयोजित की गयी थी। मानसिक तनावों (ताण) का नियोजन भी प्रशिक्षण के साथ
आवश्यक होता है इसीलिए इस कार्यशाला में नामस्मरण (नामसुमिरन) के साथ श्रद्धा, सबुरी के बारे में चर्चा की गयी। इस विभाग के सभी पुलिस स्टेशन के सभी पुलिस कर्मचारियोंने इस प्रशिक्षण का लाभ उठाया था।

नंदुरबार जिलाधिकारी ने नंदुरबार और शहादा यहाँ पर भी प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया था।

बी.ई.एस.टी. के कर्मचारी और नेव्हल डॉकयार्ड के कर्मचारियों के लिए भी यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।

  • स्थानिक और नागरी व्यवस्था से संबंधित संस्थाओं को आपातकालिन सहाय्य :

एएडीएम के डीएमव्ही आपत्ति के समय सदैव सेवा में तत्पर रहतें हैं। उदा.-

१) २६ जुलाई २००५ के दिन मुंबई में अतिवृष्टि में बचावकार्य, प्लास्टिक के हवाबंद तराफों में से महिलाएं, बच्चे, बूढे लोगों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाना, स्थानिक विक्रेताओं को माल सुरक्षित जगह पर ले जाने के लिए मदद करना, आपादग्रस्तों को एएडीएम की तरफ से कपडों और दवाईयों का बंटवारा करना।

२)इस प्रसंग के बाद मुंबई नागरी अधिकारी मान्सून डिझास्टर प्लॅन की व्यवस्था करने के लिए हर साल एएडीएम को आमंत्रित करतें हैं

३)मुंबई में साकिनाका में जब भूस्खलन हुआ था तब अग्निशामक दल और पुलिसदल को मदद की थी, मृत शरीर बाहर निकलवाना, जख्मियों को अस्पताल पहुंचाना, प्रथमोपचार करना, घटनास्थल पर से भारी (वजन के) और बड़े पत्थर हटाना यह काम किए गए थे

४)फेअरडील कॉर्पोरेशन (जोगेश्‍वरी)इस कार्यालय में २६ जनवरी २००६ के दिन लगी आग बुझाने में पुलिसदल और अग्निशामक दल को मदद की थी।

५)हंसा इंडस्ट्रियल इस्टेट (साकिनाका, मुंबई ) यहां पर ६ जुलाई २००६ के दिन लगी आग बुझाने में मदद की थी।

६)मुंबादेवी बम विस्फोट में जख्मी लोगों के प्राण बचाकर उन्हें अस्पताल में पहुंचाने में मदद की थी।

७)११ जुलाई २००६ के दिन मुंबई पश्चिम रेल्वे के लोकल ट्रेन में हुए बम विस्फोट में जख्मी लोगों को अस्पताल पहुंचाना, नोंदणी कार्यालय में और प्रथमोपचार करनेवाले स्टाफ को मदद की थी।

८)२ दिसंबर २००२ के दिन घाटकोपर और ६ दिसंबर २००२ के दिन मुंबई सेंट्रल में हुए बम विस्फोटों में डी. एम. व्ही. का मदद कार्य में सहभाग था।

ऐसे आज तक की बहुत सी नैसर्गिक और मानवनिर्मित आपत्तियों में एएडीएम ने सहाय्यता की है।

  • विविध सार्वजनिक उत्सवों के दौरान भीड पर नियंत्रण :

    १)मांढरादेवी वार्षिक यात्रा – २००५ में सातारा के मांढरादेवी के वार्षिक यात्रा में भगदड़ मची थी और लगभग २५० लोगों ने अपनी जानें गवाईं थीं और इस घटना के पश्चात्‌ भीड़ नियंत्रण बनाये रखने के लिए डीएमव्ही की सहाय्यता मांगी हुई थी। उसके आगे के साल से सेवा की शुरुआत ही थी। महिला और पुरुष डीएमव्ही ने जो सहाय्यता की थी उसे मुख्यमंत्री ने सराहा था।

२)ज्योतिबा का वार्षिक उत्सव, कुंभमेला, माऊंटमेरी यात्रा (बांदरा ),सज्जनगड पर रामनवमी के दिन भाविकों की भीड पर नियंत्रण और वैद्यकीय मदद।

३)सिद्धीविनायक प्रभादेवी मुंबई, गणपतिपुले (रत्नागिरी), सिद्धटेक (दौंड, पूना) और सप्तश्रृंगी (वणी,नासिक) यहां पर चैत्र और अश्‍विन नवरात्र सेवा, महालक्ष्मी मुंबई मंदिर में नवरात्र में भीड पर नियंत्रण, लाईन कंट्रोल, पिने के पानी की सुविधा देना, वैद्यकीय सहाय्यता देना -इस प्रकार से पुलिस दल और स्थानिक प्रशासन को मदद की जाती है।

४) सावन महिने में सोमवार और महाशिवरात्रि के दिन विविध शिवमंदिरों में यात्रा होती है – उस वक्त मुंबई और बाहरगाँवों में भीड़ पर नियंत्रण (बाबुलनाथ, महाबलेश्‍वरमंदिर, अंबरनाथ मंदिर ऐसे ११ जगहों पर)।

५)हर साल गणेश विसर्जन के समय मुंबई, पूना आदि जगहों पर भीड़ पर नियंत्रण, जुलूस पूर्ण होने तक सेवा।

६)जिजामाता उद्यान यहां पर अभी मई २०१७ की छूट्टी के कालावधि में पेंग्विन पंछी देखने के लिए बहुत ही अमाप भीड़ हुई थी, उसपर प्रशासन ने बहुत से डीएमव्ही की मदद लेकर नियंत्रण रखा था।

७)इन्कम टॅक्स रिटर्न फाईल करने के लिए कई सालों पहले भीड़ का नियंत्रण करने के लिए शासन की मदद की थी।

८)औरंगाबाद पैठण मे नाथषष्ठी के दिन भीड़ पर नियंत्रण।

९)आषाढी एकादशी के दिन पंढरपूर में लाइन कंट्रोल की सेवा।

इस प्रकार से हर साल उत्सवों में सेवा दी जाती हैं और इस के आगे भी ऐसी सेवा एएडीएम देता ही रहेगा, यह बात पक्की है।

  • गणेशमूर्ती पुनर्विसर्जन :

    विसर्जन के पश्चात भग्न (टूटी-फूटी )अवस्था में कई मूर्तियां वापस बहकर किनारे पर आतीं हैं, उसके लिए अनंत चतुर्दशी के दूसरे दिन ‘श्री अनिरुद्ध उपासना फाउंडेशन’ इस संलग्नसंस्था की सहाय्यता से डीएमव्ही ये मूर्तियाँ बोट से गहरें समुदंर में ले जाकर पुनर्विसर्जन करतें हैं।

  • व्हर्मिकल्चर- केंचुआ खाद (गांडूळखत) :

संपूर्ण महाराष्ट्र में आज तक करीब ५०० टन कचरे का लगभग ११० टन केंचुआ खाद(गांडुळखत) में रुपांतरण किया गया है। गरीब और गरजमंद किसानों को इस का विनामूल्य वितरण किया जाता है।

मध्य रेल्वे कार्यालय(मुंबई), सेबी (बांदरा),नेवल डॉकयार्ड(कोलाबा), एफ. डी. सी(जोगेश्‍वरी), पोचखानवाला बँकर्स ट्रेनिंग कॉलेज(सांताक्रूझ), डी.आय.एल.ली.(ठाना), भवन्स महाविद्यालय(अंधेरी), आय.ई.एस शाळा(मरोल), मुंबई महानगरपालिका के सभी वॉर्डस की शालाएँ, इन सभी जगहों पर एएडीएम की तरफ से व्हर्मिकल्चर- केंचुआ खाद के बारे में प्रशिक्षण आयोजित किया गया था।

  • वृक्षारोपण :

    दूसरी संलग्न संस्थाओं की मदद से DMV’s यह प्रकल्प जगह जगह पर कार्यान्वित करतें हैं। जहाँ पर जरूरत होगी वहाँ जाकर सहायता भी करतें ही रहते हैं। महाराष्ट्र में अभी तक एएडीएम की मदद से ६०,००० वृक्षों को लगाया गया है।

  • परेड :

    बहुतही अनुशासनपूर्ण और स्फूर्ती देनेवाला एक उपक्रम यानि परेड। मुंबई के १८ जगहों पर से २२० DMV’s परेड में सम्मिलित होतें हैं। महाराष्ट्र्र के दूसरे ६० केंद्रों से ४८० DMV’s परेड में सम्मिलित होतें हैं।

  • पल्स पोलियो अभियान :

    शासन मोहिम के द्वारा ६ साल से कम आयु के बच्चों को तय किए गए काल तक हर महीने में एक बार पोलियो की खुराक पिलाई जाती हैं। इसके लिए महानगरपालिका में हमें आपके एएडीएम के कार्यकर्ता उपलब्ध करके दिजिए ऐसी मांग की थी। उसी के अनुसार DMV वह सेवा देतें हैं। मुंबई, ठाना, कल्याण, डोंबिवली, नई मुंबई आदि जगहों पर कार्यकर्ताओं का सक्रिय सहभाग रहता है।

श्रीअनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन के सामाजिक और सांस्कृतिक उपक्रमों में भी एएडीएम के डीएमव्ही सेवा देतें हैं। यह उपक्रम है-

अन्नपूर्णा महाप्रसादम योजना – ग्रामीण भाग के विद्यार्थी, कोल्हापुर वैद्यकीय और आरोग्य शिविर में आनेवाले गांव के लोग – इन्हें भोजन।

इको फ्रेंडली गणेशमूर्ति – रामनाम बहियों के कागज के लगदे से गणेशमूर्तियां

रक्तदान शिविर

अनिरुद्धाज बँक फॉर ब्लाईंडस – ऑडिओ कॅसेट्स व सीडी तैयार कर के विषय समझा देना और सीडी का बंटवारा

चरखा योजना – सुत की लड़ियों से यूनिफॉर्म।

बारह मास खेती पानी, चारा योजना, खेती पानी।

रद्दी योजना।

जुने ते सोने योजना – कपडे, बर्तन , किताबें, बही, खिलौने आदि पुरानी चीजें अगर पुन: इस्तेमाल की जा सकतीं हो तो वह ज़रूरतमंद परिवारों को देना

मायेची ऊब – गुदड़ी सिलकर गरीब, बूढ़े, छोटे बच्चों को, विद्यार्थियों में, महिलाओं को देना

विद्या-प्रकाश योजना – .मोमबत्तीयां और माचिस के बक्से देकर विद्यार्थियों के लिए बिजली की रोशनी की सुविधा उपलब्ध करना।
ऐसी बहुत सी सेवाओं में DMV’s सहभाग लेतें हैं।

ए.डी.एम. की पुस्तक :

‘द टेक्स्टबुक ऑफ डिझास्टर मॅनेजमेंट’ यह अ‍ॅकॅडमीद्वारा प्रकाशित की हुई पुस्तक है। यह पुस्तके सर्वांगसुंदर मार्गदर्शक पुस्तक है। आपत्ति यानि क्या? उसके कारण कौनसे होतें हैं? उसपर उपाययोजना कौनसी? इस के बारे में मार्गदर्शन करनेवाला यह पुस्तक है। यह पुस्तक प्रथम अंग्रजी में अप्रैल २००२ में प्रकाशित हुईं जुलाई २००२ में यह मराठी भाषा में प्रकाशित हुईं अंग्रेजी किताब की दूसरी आवृत्ति दिसंबर २००२ में और तीसरी आवृत्ति जुलाई २००७ में प्रकाशित हुई। मराठी पुस्तक की दूसरी आवृत्ति नवंबर २००८ और तीसरी आवृत्ति मार्च २००९ में और चौथी आवृत्ति जुलाई २०१२ में प्रकाशित हुई।

एएडीएम के आगामी उपक्रम :

कई उपक्रम विचाराधीन हैं और वे आगे दिए हुए हैं –

प्लास्टिक के इस्तेमाल पर नियंत्रण और कायम स्वरूप का उपाय

कुष्ठरोग और इलाजों का उचित मार्गदर्शन –

एच.आय.व्ही, एड्स के बारे में उचित जानकारी और रोग ना हो इसके उपाय, इन सब का वे समर्थरूप से सामना कर रहे हैं, वे इस चुनौती को समर्थ रुप से झेल रहे हैं, और इसी में एएडीएम का यश समाया हुआ है यह निश्चित है।

कारखानों में होनेवाली आपत्तियों का अभ्यास :

इस तरह से आज के कलियुग में विश्व में एक ओर झगडे, राजकीय अस्थिरता ,वैचारिक और धार्मिक मतभेद, बढती हुई नैसर्गिक आपत्तियां, मानवनिर्मित आपत्तियां इन सब का मुकाबला कर रहा है। परमपूज्य सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध बापू के मार्गदर्शन के अनुसार एएडीएम इन सब का समर्थ रूप से सामना कर रहे हैं वे इस चुनौती को समर्थ रूप से झेल रहे हैं और इसी में एएडीएम का यश समाया हुआ है यह निश्चित है।

एएडीएम के साथ संपर्क करने के लिए और अधिक जानकारी के लिए पता आगे दिया हुआ है –

‘अनिरुद्धाज्‌ अ‍ॅकॅडमी ऑफ डिझास्टर मॅनेजमेंट’
3, कृष्ण निवास, पहली मंझिल
सखाराम कीर मार्ग, ऑफ एल.‍जे.रोड
शिवाजी पार्क माटुंगा (प)
मुंबई – ४०००१६
फोन नं (०२२) २४३०१०१०, (०२२) २४३०२४२४
ईमेल : aniruddhasadm@gmail.com
वेबसाईट : www.aniruddhasadm.com