Annapurna Mahaprasadam - Aniruddha Foundation

 “अन्नपूर्णा महाप्रसादम” की जरूरत :

गरीब या आदीवासी परिवारो में से जो बच्चे पाठशाला में पढने जाते हैं उन्हें पेटभर भोजन मिलना अत्यंत आवश्यक है; क्योंकि यही छात्र हमारे देश का भविष्य हैं। दिनभर मेहनत मजदूरी, करने के बावजूद भी इन परिवारों में सिर्फ एक बार का चूल्हा जलता है। आधे भरे या खाली पेट स्कूल आए छात्रों से ना तो पढ़ाई हो सकती और ना ही इनकी सेहत बन सकती है। स्कूल में पढनेवाले छात्रों को संतुलित और पोषक आहार मिले और इसकी चाह से ही उनके माता-पिता उन्हें हररोज स्कूल भेजें, इस हेतु से ही सही माता-पिता अपने बच्चों को पाठशाला में भेजें इसी उद्देश्य से यह योजना कार्यविन्त की गयी।

यह सोचकर सन २००७ में श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन और संलग्न संस्थाओं ने सद्गुसरु श्री अनिरुद्ध बापू के मार्गदर्शनानुसार “अन्नपूर्णा महाप्रसादम” यह योजना शुरु की है।

“अन्नपूर्णा महाप्रसादम” इसका क्या मतलब है?

श्रद्धावान धान्य और अनाज का दान करके अपने सदगुरु के प्रति प्रेम व्यक्त करते हैं और इसी प्रेम और श्रद्धा से स्कूलों में श्रद्धावान सेवक भोजन पकाकर छात्रों को खिलाते हैं। उनकी इस निष्काम सेवा और भक्ती¬ से यह भोजन अन्नपूर्णा देवी का प्रसाद याने अन्नपूर्णा महाप्रसादम कहा गया है।

वितरण और कार्यवाही :

१. चावल, दाल, अनाज, मसाले, तेल ऐसी सामग्री दान स्वरुप में ही श्री अनिरुद्ध गुरुक्षेत्रम, खार (प), मुम्बई और श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन के संलग्न केंद्रों में स्विकार किया जाता है। हर गुरुवार को श्री हरिगुरुग्राम (न्यू इंग्लिश स्कुल, बांद्रा (पूर्व) यहां पर भी यह अन्नदान स्वीकारा जाता है।

२. इसके बाद यह अनाज मुंबई के पास स्थित विरार, ठाणे के दुर्गम गावों में भेजा जाता है। उन गावों की पाठशालाओं में स्थानिक श्रद्धावान सेवक हररोज अच्छा भोजन पकाकर इन छात्रों को खिलाते हैं। इसी के साथ रसोई की जगह साफ सुथरी रखना, बर्तन अच्छे से साफ करने का काम भी इन्हीं श्रद्धावान सेवकों द्वारा किया जाता है।

३. इस योजना से दान का पुण्यकर्म तो होताही है पर साथ ही श्रमदान सेवासे सेवको को अपने बुरे प्रारब्ध नष्ट करने के लिए सदगुरु का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

इन्फोग्राफिक

सद्य परिस्थिती :

अभी इस योजना के तहत श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन २० से ज्यादा पाठशालाओं में अपनी सेवा प्रदान कर रही है। उदाहरण के तौर पर अगर देखा जाए तो केलवे रोड के विद्या वैभव विद्यालय में लगभग २५०-३०० छात्र इसका लाभ उठा रहे हैं। इस पाठशाला में आदीवासी, श्रमजीवी वर्ग से और अन्य जरुरतमंद वर्गों से बच्चे आते हैं। विरार, सफाले और मायारखोप के अनिरुद्ध उपासना केंद्रों से सेवक इस विद्यालय में सेवा करने जाते हैं। इनके दोपहर के खाने में दाल, चावल और उसल दी जाती है। अगर पाठशाला दो पारी में चलती हो तो सेवक दो पारी के बीच के समय में याने ११.३० से २.०० बजे के समय में खाना पकाते हैं जिसकी वजह से दोनों पारी के सभी छात्रों को इसका लाभ होता है। आज के समय में श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन और संलग्न संस्थाओं के ७००-८०० सेवक इस सेवा में लगे हुए हैं। वे अपना काम-धंदा संभालके सेवा के लिए समय निकालते हैं।

कोल्हापूर मेडिकल कॅम्प और आरोग्यस्वास्थ शिविर

Annapurna Prasadam-Kolhapur Medical Camp

कोल्हापुर के पेंडाखले गांव में होनेवाले इस शिविर में १०० से अधिक स्कूलों से ९००० से अधिक छात्र आते हैं। शिविर में होनेवाले अन्नपूर्णा महाप्रसादम का आनंद उठाते है। बच्चे खाने के बाद अपनी थाली खुद साफ करते हैं। बच्चों को भगवान का नाम लेकर (वदनी कवळ घेता….) उसे धन्यवाद देकर भोजन ग्रहण करने का संस्कार भी दिया जाता है।

इसकी वजह से यह “अन्नपूर्णा महाप्रसादम” यह योजना सिर्फ भूख मिटानेवाली योजना नहीं है; हमारे भविष्य की पिढी को मानसिक, शारिरीक और अध्यात्मिक रुपसे सक्षम और उज्वल बनानेवाली महत्त्वपूर्ण योजना है।

ब्लॉग लिंक : http://aniruddhabapu-annapoornaprasadam.blogspot.in

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