सन २०१६-१७ में अपने देश को १९ लाख यूनिट्स रक्त की कमी महसूस हुई थी। सन २०१५-१६ में यह संख्या ११ लाख थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि कितने बड़े पैमाने पर अस्पतालों को रक्त की ज़रूरत है। हर वर्ष देश को पाँच करोड़ यूनिट्स रक्त की आवश्यकता होती है। हर २ पल में किसी न किसी मरीज को रक्त की ज़रुरत पड़ती है। इन बातों के मद्देनजर हर रोज ३८ हजार से अधिक रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जाना चाहिए। यह जानकारी खबरों से तथा कई संस्थाओं द्वारा दिए गए विवरणों से पाई गई है। इससे रक्त और रक्तदान शिविरों का महत्व समझ में आता है। समय के रहते ही इस बात की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी ने अपने कार्य में रक्तदान का समावेश किया।

’परमात्मा को नौं प्रकार की बूंदें बहुत भाती हैं, जिसमें एक श्रद्धावान द्वारा दूसरे श्रद्धावान के लिए निरपेक्ष भावना से किए गए रक्तदान की बूंदें भी महत्वपूर्ण हैं, यह बात सद्गुरु श्री अनिरुद्धजी ने श्रीमद्पुरुषार्थ ग्रंथराज के ’आनंदसाधना’ नामक तृतीय खंड में कही है।

सन १९९९ से सद्गुरु श्रीअनिरुद्ध उपासना ट्रस्ट, अनिरुद्ध समर्पण पथक, अनिरुद्धाज ऐकेडमी ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट, दिलासा मेडिकल ट्र्स्ट ऐन्ड रिहैबिलिटेशन सेंटर, श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन, अनिरुद्धाज हाऊस ऑफ फ्रेंड्स यह संलग्न संस्थाएं हर वर्ष अप्रैल महीने में महारक्तदान शिविर का आयोजन करती हैं। यह शिविर बांद्रा, न्यू इंग्लिश स्कूल (श्रीहरिगुरुग्राम) में आयोजित किया जाता है।

अप्रैल महीने में ही क्यों? क्योंकि, गरमी की छुट्टियों में कई लोग गांव जाते हैं। तब रक्त की बड़े पैमाने पर कमी महसूस होती है। इसलिए अप्रैल महीने में ही रक्तदान शिविर आयोजित किया जाता है।

२१ फरवरी १९९९ में संस्था ने दादर के स्वातंत्र्यवीर सावरकर स्मारक में पहले रक्तदान शिविर का आयोजन किया था। एक दिन के इस रक्तदान शिविर में १५४ यूनिट्स रक्त जमा किया गया था। जमा किया गया रक्त टाटा रक्त कोष के सुपूर्द किया गया।

इस शिविर को १९ वर्ष पूरे हुए। इन १९ वर्षों में शिविर का स्वरूप पूरी तरह से बदल गया है। रक्तदान शिविर के बारे में उपासना केंद्रों में जागरुकता निरमाण की गई। इसके पश्चात धीरे-धीरे इस शिविर को प्रतिक्रिया मिलने लगी। आज इस शिविर में हजारों की संख्या में रक्तदाता भाग लेते हैं। केवल मुम्बई में ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र में अन्य स्थानों पर भी एकसाथ रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं।

सन १९९९ में १५४ रक्त के यूनिट्स जमा हुए। तत्पश्चात दूसरे वर्ष अर्थात सन २००० में ४१२ रक्त के यूनिट्स और सन २००१ में ६१३ रक्त के यूनिट्स जमा हुए। सन २००२ में हजार से अधिक अर्थात १५४८ रक्त के यूनिट्स जमा हुए। इसके पश्चात यह संख्या निरंतर बढ़ती ही गई (यह निम्नलिखित है)।

सन २००३ – २४१३

सन २००४ – २४०४

सन २००५ – २३८०

सन २००६ – ३६७६

सन २००७ – २३५२

सन २००८ – २८६६

सन २००९ – ३१७९

सन २०१० – ३०८३

सन २०११ – २४९६

सन २०१२ – ४६९१

सन २०१३ – ५१७८

सन २०१४ – ५७४६

सन २०१५ – ५२२९

सन २०१६ – ४५०४

सन २०१७ – ५२८८

सन २०१८ – ५८३८

सन २०१८ में राज्य में अन्यत्र आयोजित शिविरों में २९३२ रक्त के यूनिट्स जमा हुए।

सन १९९९ से सन २०१८ तक आयोजित रक्तदान शिविरों में एक लाख से अधिक रक्त के यूनिट्स जमा किए गए हैं। यह सद्गुरु श्री अनिरुद्ध उपासना ट्रस्ट का विक्रम ही माना जाएगा। ’महाराष्ट्र राज्य रक्तसंक्रमण परिषद’ ने संस्था की प्रशंसा करते हुए कहा कि, ’रक्तदान शिविरों का आयोजन कैसे किया जाए’ इसका मानो यह रक्तदान शिविर मॉडेल ही बन गया है। इसके अलावा, संस्था को अन्य संस्थाओं द्वारा उनके लिए रक्तदान शिविर के आयोजन हेतु निमंत्रित किया जाता है। रक्तदान शिविर को प्राप्त यह सबसे बड़ा यश है।

सन २०१० में एक राजनीतिक दल ने रक्तदान शिविर के आयोजन के लिए संस्था को निमंत्रित किया था। उस शिविर में २५,००० बोतलें रक्त जमा कीया गया था। यह करतब ‘गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्डस्’ में दर्ज हुआ।

सैंकड़े से हुई यह शुरुआत आज हजारों तक पहुंच चुकी है, इसका कारण इसके प्रति लोगों में लाई गई जागरुकता है। अनेक लोग रक्तदान करने से डरते हैं, मगर रक्तदान शिविर में केवल ३०० मि.ली. रक्त लिया जाता है। रक्तदान के बाद ३६ घंटों में शरीर में रक्त का स्तर पूर्ववत हो जाता है और दो-तीन हफ्तों में प्लेटलेट्स भी पूर्ववत हो जाते हैं। रक्तदान करने से किसी भी तरह की तकलीफ या ज़खम नहीं होती। हमारे कुछ मि.ली. खून से किसी की जान बचाई जा सकती है। यह बात सभी श्रद्धावानों को समझाने में संस्था और उपासना केंद्रों को भारी सफलता मिली।

रक्तदान शिविर से महीनाभर पहले सभी उपासना केंद्रों के श्रद्धावानों को रक्तदान के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इतना ही नहीं तो श्रद्धावान अपने रिश्तेदारों एवं मित्र-परिवारों को भी रक्तदान शिविर की जानकारी देकर उन्हें इसमें शामिल करते हैं। रक्तदान शिविर से पहले रक्तदान करने हेतु किस तरह का आहार करना चाहिए? कौन रक्तदान कर सकता है? रक्तदान से पहले किन किन बातों का खयाल रख जाना चाहिए? इसकी विस्तृत जानकारी दी जाती है। अब तो सोशल मीडिया के माध्यम से रक्तदान के प्रति जागरूकता निर्माण की जाती है।

रक्तदान शिविर में अस्पताल और रक्त कोष सहभागी होते हैं। उनके डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ के साथ संस्था के वैद्यकीय शाखा के डॉक्टर एवं पैरामेडिकल सदस्य भी उतनी ही तत्परता से सारा दिन रक्तदाताओं की सहायता के लिए उपस्थित रहते हैं।

रक्तदान शिविर के दिन सुबह से रक्तदाताओं की कतार लगी रहती है। उपासना केंद्र के श्रद्धावान बसों से इस स्थान पर पहुंचते हैं। शिविर का आयोजन बहुत सुलझे हुए ढंग से किया हुआ होता है। सबसे पहले रक्तदाताओं से काऊंटर पर पूछा जाता है कि उन्होंने चाय-नाश्ता किया है कि नहीं? यदि नहीं किया है तो यह उनके लिए उपलब्ध कराया जाता है। इसके बाद उनके द्वारा फॉर्म भरवाया जाता है। हीमोग्लोबिन आदि की जांच के बाद ही रक्तदाता को रक्तदान के लिए आगे भेजा जाता है।

इसके अलावा क्राऊड मैनेजमेंट की भी व्यवस्था होती है। इसकी वजह से धक्काधुक्की नहीं होती। भक्तिमय वातावरण  होता है। गजर की धुन में रक्तदाता रक्तदान करते हैं। इसकी वजह से उनका डर कम हो जाता है और उनका उत्साह अधिक बढता है। रिजेक्ट किए गए श्रद्धावान ’चरखा’ चलाने की सेवा करते हैं और अगले वर्ष निश्चितरूप से रक्तदान करने की शपथ लेते हैं।

सन २०१८ का रक्तदान शिविर –

२२ अप्रैल २०१८ ‘श्री अनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन’ एवं संलग्न संस्थाओं द्वारा राज्यभर में एकसाथ ३९ स्थानों पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। संस्था द्वारा किए गए इस महारक्तदान शिविर में कुल ८७७० यूनिट्स रक्त जमा किया गया। इसमें मुम्बई में बांद्रा (पूर्व) में आयोजित महारक्तदान शिविर में ५८३८ यूनिट्स एवं राज्यभर में अन्यत्र आयोजित शिविरों में २९३२ यूनिट्स रक्त जमा किया गया।

मुम्बई के अलावा पुणे, कोल्हापुर, रायगड, रत्नागिरी, अकोला, जलगाव, सिंधूदुर्ग, पालघर जिलों में भी रक्तदान शिविर आयोजित किए गए। पुणे जिले में कुल १७ स्थानों पर आयोजित शिविरों में १६४० यूनिट्स, कोल्हापुर में ४२४ यूनिट्स जमा किए गए, तो पालघर जिले के बोईसर में १२७, पालघर में १३१, डोंगस्त में ८३ यूनिट्स रक्त जमा हुआ। इसके अलावा उरण में १२१, अकोला १६, मिरज ६२, वाघोटन २८, संगमनेर ७२, चोपडा ११ और डहाणू रोड में आयोजित किए गए रक्तदान शिविर में ८९ यूनिट्स रक्त जमा किया गया।      

बांद्रा के रक्तदान शिविर में ४० रक्त कोष शामिल हुए थे जिसमें के.ई.एम हॉस्पिटल, नायर हॉस्पिटल ब्लड बैंक, सैफी हॉस्पिटल, कोकिलाबेन धीरुबाई अंबानी हॉस्पिटल, जे.जे.महानगर ब्लड बैंक, बाबासाहेब आंबेडकर म्युनिसिपल हॉस्पिटल, सायन हॉस्पिटल, राजावाडी हॉस्पिटल, ‘आयुष ब्लड बैंक’ (नागपुर), ब्लड लाईन (थाने), वाडिया हॉस्पिटल, डी.वाय.पाटील हॉस्पिटल, बॉम्बे हॉस्पिटल, मसीना हॉस्पिटल, टाटा हॉस्पिटल समेत अन्य रक्त कोषों का समावेश था।

रक्तदान शिविर केवल एक दिन तक ही सीमित नहीं होते। उपासना केंद्र हर छ: महीनों में रक्तदात शिविर का आयोजन किया करते हैं। उन रक्तदान शिविरों को भी बहुत अच्छी प्रतिक्रिया प्राप्त होती है।

अपने देश में रक्त की कमी महसूस होती है, ऐसी स्थिति में हर वर्ष अयोजित किए जानेवाले रक्तदान शिविर का महत्व अधिक है। इसीलिए रक्तदान शिविर में रक्तदान करना चाहिए।