Eco Friendly Ganpati

हम बड़े ही प्यार से उत्साह से गणपती लाते हैं। पाँच दिन, दस दिन मन:पूर्वक गणपती की पूजा करते हैं। प्रसाद, नैवेद्य, मंगलागौरी, भजन, पूजा इस तरह से हर प्रकर से हम उस मंगलमूर्ति को प्रसन्न करते हैं, मात्र बाप्पा का विसर्जन करने के पश्चात्‌ वह मूर्ति पानी में पूर्णत: पिघलती नहीं है।

दूसरे दिन वह किनारे पर आकर पड़ी रहती है। अपनी संस्था के कार्यकर्ता मात्र काफी पैमाने पर समुद्र के सभी किनारों पर पुर्नविसर्जन करते रहते हैं। गणेशमूर्ति में काफी बड़े पैमाने पर उपयोग में लाये जाने वाले रासायनिक रंग एवं प्लॅस्टर ऑफ पॅरिस के कारण होने वाले जल प्रदुषण को टालने के लिए अपनी संस्था ने ‘इको फ्रेंडली गणेश मूर्ति’ बनानी शुरु कर दी है।

                       

इको-फ्रेंडली गणपती यह पर्यावरण से संबंधित एक स्तुति योग्य उपक्रम हैं, जिसमें कागज के लग्दे से गणपती की सुंदर मूर्तियाँ बनाई जाती हैं। अनिरुद्ध आदेश पथक के उपासकों ने इकोफ्रेंडली गणपती की मूर्तियाँ बनाने का काम अपने हाथों में लिया है।

भक्तिमय निष्काम सेवा से विविध उपासना केन्द्रों के श्रद्धावान एवं कार्यकर्ता श्री गणेशजी की अत्यन्त सुंदर एवं आकर्षक मूर्तियाँ बना रहे हैं। इसके लिए श्रद्धावानों द्वारा लिखकर जमा की गई रामनाम बहियों के कागजों का लग्दा बनाकर उसका उपयोग किया जाता है। पानी में बिलकुल ही सहजता के साथ पिघल जानेवाली इन मूर्तियों को रंगने के लिए नैसर्गिक रंगों का उपयोग किया जाता है। प्लॅस्टर ऑफ पॅरिस, हानीकारक रंगों आदि का उपयोग इसमें नाममात्र भी नहीं किया जाता है।

                       

रंग, रूप सहित अनेकानेक आकारों के साँचे और लोगों की इस संबंध में पसंद आदि से संबंधित संशोधन इस संस्था ने किया, लोगों का अभिप्राय समझा और मूर्तियाँ तैयार की जाने लगीं साथ ही लोगों का इसके प्रति अच्छा उत्साही प्रतिसाद भी मिल रहा है। रामनवमी से हर गुरुवार के दिन श्रीहरिगुरुग्राम न्यु इंग्लीश स्कूल बांद्रा में शाम के ६ बजे से बुकिंग शुरु हो जाती है। इस समय आकर्षक मूर्तियाँ भी देखने के लिए रखी जाती है।

कैसे तैयार की जाती हैं ये मूर्तियाँ?

अनिरुद्ध फौउंड़ेशन के उपासकों द्वारा प्रतिदिन लिखी जा रही रामनाम की बहियों के जप के कागजों का उपयोग करके गणेश मूर्तियाँ बनानी शुरू कर दी गईं। सर्वप्रथम संपूर्ण दिवस इन कागजों को भिंगोने के पश्चात्‌ सफेद स्याहि एवं वृक्षों से निकाला गया गोंद उसमें मिलाकर उससे लग्दा तैयार किया जाता है। फिर उस लग्दे को साँचे में डाला जाता है। इससे तैयार होनेवाली मूर्तियों को धूप में सुखाया जाता है। इसके पश्चात्‌ नैसर्गिक रंगो का उपयोग करके सुंदर, सुघड़ मूर्तियों में रंग भरा जाता है। पानी में तुरंत ही पिघल जाने वाली तथा रासायनिक रंगो का जरासा भी उपयोग न की गईं ये इको फ्रेंडली गणेश मूर्तियाँ इको में रासायनिक रंगों के बजाय इनमें इको फ्रेंडली रंगो का उपयोग किया जाता है।

ऐसी इस निष्काम, नि:स्वार्थी प्रेरणा से चल रहे कार्य में सभी उम्र के स्त्री, पुरूषों के साथ-साथ छोटे बच्चों का कार्य भी सरहनीय होता है।यहाँ पर अर्थाजन अथवा पैसे कमाने का उद्देश्य न होकर लोगों में इको फ्रेंडली गणेश मूर्ति संबंधित जन-जागृति फैलाने का उद्देश्य होने के कारण ऐसी मूर्तियाँ बनाने का प्रशिक्षण देने की व्यवस्था फौउंड़ेशन की ओर से विनामुल्य की जाती है।

मुंबई से बाहर पूना, कोल्हापुर, औरंगाबाद, सातारा, नगर अकोला, नासिक, नागपुर में भी ये मूर्तियाँ विराजमान हो चुकी हैं। लग्दे की मूर्तियों में  ऊँचाई का कोई बंधन नहीं रहता है।

गणेशोत्सव पर्यावरण पूरक ही होना चाहिए, यह अपनी कृति से प्रत्यक्षरूप में दिखा देने वाले “श्रीअनिरूद्ध उपासना फौउंड़ेशन” समान संस्था का अनुकरण यदि हर एक सुजान गणेशभक्त करता है तब सार्वजनिक गणेश उत्सव के कारण होनेवाले पर्यावरण र्‍हास पर मात्र काबू निश्चित ही प्राप्त किया जा सकता है। सार्वजनिक उत्सव मनाते समय पर्यावरण का र्‍हास न होने पाये इसके लिए पर्यावरण जनजागृति का एक महत्वपूर्व संदेश इको फ्रेंडली गणेशोत्सव के माध्यम से हम गणेश भक्तों तक पहुँचा सकते हैं।

गणपती बुकिंग जानकारी एवं उसका लेखा-जोखा।

गणपती बुकिंग माहितीसाठी

हरिशसिंह महाजन

मोबाईल नं – +९१-९८२००२९२०९

ई-मेल – hareeshmahajan@gmail.com

मिलिंदसिंह सलगरकर

मोबाईल नं – +९१-९५४५४५५०६५

ई-मेल- milindsalgarkar@gmail.com

मिलिंदसिंह नाईक

मोबाईल नं – +९१-९८३३९३८३५२

ई-मेल- milind189@gmail.com