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हेतु एवं आवश्यकता :

हम सभी चाहते हैं कि हमें भगवान की कृपा प्राप्त हो और हम भगवान की ममता, वत्सलता की गरमाहट अनुभव कर सकें। विठ्ठलजी संत जनाबाई की गुदड़ी लेकर गए और अपना दुशाला भूल गए। इससे यह बात ध्यान में आती है कि कहीं न कहीं गुदड़ी का बडा ही महत्व है। मगर कई मेहनतकश लोगों को यह गुदड़ी भी नसीब नहीं होती। इसी हेतु से  अनिरुद्ध बापूजी ने ‘ममता की गरमाहट’ नामक प्रकल्प शुरु किया जिसके अंतर्गत गुदड़ीयां बनाई जाती हैं। मेहनतकश जरुरतमंदों को केवल कडाके की ठंड से बचाना ही इन गुदड़ीयों का कार्य नहीं है, बल्कि प्रेम, ममता की गरमाहट प्रदान करनेवाली यह गुदड़ी, मूलभूत जरुरतों में से वस्त्र और निवारा की सुविधा भी देती है।

गुदड़ी बनाने की कृति :

पुरुष एवं महिलाएं दोनों को इसका प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें पुरानी साडियों एवं चद्दरों से गुदड़ीयां बनाने के तरीके सिखाए जाते हैं। गुदड़ी सीते समय टाके बहुत छोटे, नाजुक होते हैं ताकि छोटे बच्चों के कान की बालियां या पैरों के छल्ले उनमें अटकने न पाएं। यह गुदड़ीयां वजन में हलकी बनानी पड़ती हैं ताकि गर्भवती महिलाएं भी उन्हें आसानी से धोकर, निचोड़कर सूखा पाएं। गुदड़ीयां चारों तरफ से इस तरह बंद की जाती हैं कि जिनकी वजह से कीड़े, केंचुए, सपोले आदिवासी जंगली इलाकों में भी गुदड़ी के भीतरी भाग में घुस न सकें।

गुदड़ी की विलक्षण विशेषता :

बाजार में उपलब्ध और श्रद्धावानों द्वारा अपने हाथों से बनाई गई गुदड़ीयों में निश्चितरूप से फर्क है। श्रद्धावान गुदड़ीयां बनाते समय भक्तिभाव से परामात्मा का नामस्मरण करते हुए बनाते हैं। इसकी वजह से इनमें ममता का अंश होता है जिसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। जो कोई यह गुदड़ीयाँ इस्तेमाल करते हैं उन जरुरतमंदों को वे किसने बनाई हैं, किसने दान स्वरूप दी हैं यह पता नहीं चलता, मगर ओढ़ने पर प्राप्त होनेवाली ममता की गरमाहट उस व्यक्ति को सुकून देती है। जिन जरुरतमंदों को गुदड़ी प्राप्त होती हैं उनके चेहरे पर खुशी की, तृप्ति की लहर दिखाई देती है, तो जिन्होंने प्रेम से वह गुदड़ी बनाई होती है उनके चेहरों पर संतोष झलकता है!

दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि श्रद्धावान गुदड़ी बनाने के लिए श्रीअनिरुद्धाज गुरुक्षेत्रम  में माता अनसुयामाता, महिषासुरमर्दिनी (बड़ी माँ) को अर्पण किए गए ब्लाऊजपीस एवं दत्तगुरुजी को अर्पण किए गए दुशालों का नि:शुल्क इस्तेमाल करते हैं। अनसुयामाता, महिषासुरमर्दिनी (बड़ी माँ) प्रेम की भी गरमाहटभरा स्पर्श हर जरुरतमंद व्यक्ति को गुदड़ी द्वारा प्राप्त होता है, यह कहना बेवाजिब नहीं होगा।

गुदड़ीयों का वितरण :

हर वर्ष कोल्हापुर एवं विरार (मुम्बई) में होनेवाले मेडिकल कैम्पों में जरुरतमंद परिवारों को गुदड़ीयां वितरित की जाती हैं। २६ जुलाई २०११ के दिन मुम्बई में आई बाढ की वजह से कई गुदड़ीयां जरुरतमंद परिवारों में बांटी गईं। ऐसी यह प्रेम, ममता भरी गरमाहट परमपूज्य बापूजी की कृपा से जरुरतमंदों को सदैव मिलती रहे, यही सद्गुरु श्रीअनिरुद्धजी के चरणों में हम प्रार्थना करते हैं।