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वात्सल्य की गरमाहट सेवा / मातृत्व की गर्मी

अहिल्यासंघ द्वारा संचालित / होनेवाला यह एक सातत्यपूर्ण उपक्रम है। वात्सल्य की गरमाहट का अर्थ स्त्रियों की बुनाई की सेवा। इस सेवा में दो सुइंयो पर स्वेटर बुने जाते हैं।

हमारे देश में अत्यंत गरीबीं के कारण अपना बचाव न करने के कारण कई लोग मृत्यु के मुख में जाते हैं यानी उनकी मौत होती है। इसमें बहुत छोटे बच्चे और वृद्ध लोगों का ज्यादा प्रमाण में समावेश होता है। इस सेवा के अंतर्गत नवजात शिशु से लेकर १० वर्ष के लड़के-लड़कियों वैसे ही ज्येष्ठ नागरिकों के लिये स्वेटर बुने जाते हैं व गंतव्य पर पहुंचाये जाते हैं।

इस सेवा में श्रद्धावान स्वयं के द्वारा बुने हुए स्वेटर्स मोजे, मफलर जैसी अनेक जरूरी वस्तुएँ स्वकष्ट करके बुनकर अथवा खरीदकर दान दे सकते हैं।

जिन स्त्रियों को बुनाई सिखने की ईच्छा होती है उनके लिये अहिल्यासंघ के द्वारा उन श्रद्धावानों को विनामूल्य बुनना सिखलाया जाता है। इस प्रशिक्षण सप्ताह में दो दिन दिया जाता है और प्रशिक्षण की अवधि साधारण छह मास की होती है। इस प्रशिक्षण के वर्ग में नवजात शिशु से दस वर्ष के बच्चों और जेष्ठ नागरिको के लिए स्वेटर बुनना सिखलाया जाता है।

साधारणत: पचास वर्ष के बाद अधिक तर गृहणियाँ अपने घर-गृहस्थी की जिम्मेदारी से मुक्त हो जाती हैं। इन गृहणियों के पास काफ़ी समय होता है इस रिक्त समय को स्वेटर बुनने के उपयोग में लाया तो हमें अपना जीवन सार्थक हुआ ऐसा समाधान मिलता है।

श्रीअनिरुद्ध उपासना ट्रस्ट व संलग्न संस्था द्वारा आज तक २०,३५५ स्वेटरों का वितरण किया गया है।

प्रेम व निरपेक्ष भावना से बुने हुए स्वेटर सिर्फ ऊनके न होकर वात्सल्य के गर्माहट के होते हैं जो मनुष्य को जीवन में तन कर खड़े रहने के लिए मदद करते हैं। ऐसा यह वात्सल्य की गर्मी सेवा स्वेटर दान करनेवालों एवं स्वीकार करनेवालों दोनो के प्रति यह वरदान ही है।