महिलाओं की श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्ती का अर्थ क्या है ?

हम लोग इस विश्व में आनंदपूर्वक जी रहे हैं, घूम-फिर रहे हैं इस का सारा श्रेय केवल अपनी इस आदिमाता जननी को ही जाता है क्योंकि वे ही इस विश्व को निर्माण करनेवाली हैं, इस विश्व का पालन करनेवाली हैं। नव निर्मिती की ताकत लेकर इस वसुंधरा पर रहनेवाली महिला यानि उन्हीं का प्रतीक है। विश्व की असामान्य ताकत, सामर्थ्य हर एक महिला के पास हो ही है। ऐसा कहा जाता है कि परिवार में एक महिला अगर सक्षम है, मजबूत है तब वह परिवार भी वैसा ही होता है। हर एक महिला यह परिवार के लिए वत्सल माता होते हुए भी उसी परिवार के रक्षण के लिए एक वीरांगना भी है यह बात हमें भुलनी नहीं चाहिए। उसके इस स्वरूप को आदिमाता से ही अधिक बल प्राप्त होने के लिए और आदिमाता के पुत्र से समर्थन मिलने के लिए सदगुरु श्री अनिरूध्द बापू ने रामराज्य २०२५ के पितृवचन के समय एक अत्यंत सुंदर उपासना (प्रपत्ति) बतायी है। इस प्रपत्ति को “श्रीमंगलचण्डिका प्रपत्ति” कहतें हैं। यह प्रपत्ति करना यानि आदिमाता और उनके पुत्र परमात्मा (महाविष्णु, साई स्वामी) पर एकत्रित और संपूर्ण रीति से विश्वास रखकर अपना प्रपंच और परमार्थ सुखदायी बनाना।

बापू कहतें हैं :

मंगलचण्डिकाप्रपत्ति महिलाओं कों पराक्रमी सैनिक बनाती हैं। स्वयं के गृह रक्षण के लिए, स्वयं के आप्तों के रक्षण के लिए। यह रक्षण करने का काम आज की महिलाएँ कर सकतीं हैं। वे अबला नहीं रहेंगी। वे स्वयं समर्थ बनेंगी। केवल एक बात ध्यान रहे, नित्य गुरुमंत्र का पठण और संक्राति के दिन यह प्रपत्ति दिल से करना आवश्यक है।

श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्ति कब करनी है ?

यह प्रपत्ति मकरसंक्राति के दिन सूर्यास्त के पश्चात महिलाओं ने एक साथ मिलकर खुली जगह में करनी है।

मकरसंक्रात यही दिन क्यों चुना है?

बहुत सालों पहले महिषासुर नाम के असुर ने पृथ्वी पर सभी जगहों पर उधम मचाया था। उसका वध करने के हेतु आदिमाता ने पृथ्वीपर अवतार लेने का निश्चय किया। आदिमाताने ऋषि कर्दम और देवहूति इनके कतराज आश्रम में इसी दिन पहला कदम रखा था। सूर्यास्त के उपरांत उन्होंने वसुंधरा अपना कदम रखा था इसीलिए यह प्रपत्ति सूर्यास्त के पश्चात्‌ ही की जाती है।

प्रपत्ति कैसे करनी है इस के बारे में पूरी जानकारी चण्डिकाप्रपत्ति ब्लॉग पर मिलेगी।-  http://aniruddhabapu-chandikaprapatti.blogspot.in/

श्रीमंगलचण्डिकाप्रपत्ति के लाभ :

हर एक महिला को मानसिक और शारीरिक ताकत पाने के लिए यह प्रपत्ति जरूरी है। इस प्रपत्ति से महिला को किसी भी तरह का रक्षण करने के लिए मनोबल प्राप्त हो सकता है। वह अबला नहीं रहेगी, दुर्बल नहीं रहेगी। वह खुद समर्थ बनेगी। हर एक अनिरूध्द उपासना केंद्र के द्वारा इस प्रपत्ति का आयोजन किया जाता है और हजारों महिलाएं इस प्रपत्ति का लाभ हर साल लेतीं हैं।