AniruddhaFoundation-Sundarkand

 

१) श्रीरामकथा एवं सुंदरकाण्ड :

सुंदरकाण्ड रामायण का एक अंश है और रामायण यह रामकथा ही सुंदरकाण्ड में हनुमानजी की भक्ति का वर्णन किया गया है। यह अध्याय अत्यन्त शुभ, तेजोमयी उत्कृष्ट शिखर है। श्रीराम कथा सभी विघ्नों का, सभी पापोंका, दु:खोंका एवं विकारों का अंत करनेवाली तो है ही, परन्तु इसके साथ ही विशुद्ध भक्ति का उदय करनेवाली भी है। श्रद्धावानों के जीवन से सभी बुराईयों का अंत करनेवाली एवं अमंगल का मंगल करनेवाली होने के कारण संत तुलसीदास इसे ‘मंगल भवन अमंगलहारी’ कहकर संबोधित करते हैं।

२) सुंदरकाण्ड की यशगाथा :

सुंदरकाण्ड अर्थात महाबली हनुमानजी ने लंका दहन, उसके पश्‍चात श्रीराम हनुमानजी की हृदयस्पर्शी भेट, श्रीराम बिभिषण भेट, प्रभुश्री ने रावण दूतों को की हुई क्षमा, इसके पश्‍चात्‌ श्रीराम का गुणसंकीर्तन करनेवाला रावण को कहा गया सत्यवृत्तांत लक्ष्मण जी द्वारा रावण को दिया गया पत्र , सागरद्वारा श्रीराम के समक्ष स्वीकारी गई शरणागति, इसके पश्‍चात्‌ उत्कृष्ट सेतुबंधन तथा श्रीराम लक्ष्मणसहित वानरसेना का लंकापर किया गया आक्रमण ऐसी है यह सुंदरकाण्ड की यशोगाथा।

३) सुंदरकाण्ड पठन की फलश्रृति :

सुंदरकाण्ड अर्थात भगवान एवं भक्ति के माधुर्य का एकरस मिश्रण। जो कोई भी सुंदरकाण्ड का पठन एवं श्रवण प्रेमपूर्वक एवं आत्यंतिक विश्‍वास पूर्वक करता है, उसकी रक्षा एवं संकट हरण प्रभुश्रीराम एवं हनुमान करते ही हैं ऐसा श्रद्धावानों का दृढ विश्‍वास है। हनुमानजी अर्थात भक्ति, शारण्य एवं पराक्रम का अत्युच्च शिखर। सेवा, त्याग, सामर्थ्य, पावित्र्य एवं पुरुषार्थ का प्रतिरुप अर्थात श्रीहनुमान! हनुमानजी बुद्धिमानों में सबसे वरिष्ठ सर्वोत्तम हैं!

सुंदरकाण्ड श्रद्धावानों को ऐसा महान संदेश देता है कि ‘श्री हनुमान स्वयं परमेश्‍वर स्वरूप होते हुए भी स्वयं को प्रभु श्रीराम का दास मानकर प्रभु श्रीराम का कार्य करते हैं।

४) सुंदरकाण्डसे संबंधित अग्रलेखों का क्रम :

३ मैं २००७ के नारदजयंती से सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू ने सुंदरकाण्ड पर लेखमाला अग्रलेख लिखना आरंभ किया। यह अग्रलेख अर्थात हरएक श्रद्धावान को अपना जीवन सुंदर एवं पुरुषार्थी बनाने का सुनहरा राजमार्ग ही हैं।

सद्गुरु श्री अनिरुद्ध बापू सुंदरकाण्ड के संबंध में बोलते समय कहते है कि सुंदरकाण्ड यह रामायण का सुंदर दैदिप्यमान तेजस्वी एवं शुभप्रद शिखर है। और उसपर दत्तगुरु की कृपा से मेरा अपरंपार प्रेम है। सुंदरकाण्ड के हर एक दोहे पर मैंने जो लेख लिखा है, वे लेख अर्थात सुंदरकाण्ड के पावित्र्य को मेरे द्वारा सन्मानपूर्वक किया गया दंडवत है।

इसी तरह  कई बार परम पूज्य बापू ने अपने पितृवचन द्वारा सुंदरकाण्ड के बारे में बताया है।

५) सुंदरकाण्ड पठन उत्सव:

१. १५ नवम्बर २००४ से एक सप्ताह हॅप्पीहोम में सुंदरकाण्ड उपासना की गयी थी इसमें संपूर्ण सुंदरकाण्ड के होम सहित दिन में तीन आवर्तन होते थे।

२. १०/१/२०१६ से १८/१/२०१६ श्री अनिरूद्ध गुरुक्षेत्रम्‌ में सुंदरकाण्ड पठन किया गया।

३. १७ /५/२०१६ से २१/५/२०१६ इस दौरान श्री अनिरूद्ध उपासना फाऊंडेशन द्वारा सुंदरकाण्डपठन, पूजन एवं अभिषेक उत्सव हरिगुरुग्राम में किया गया। सुबह ९ बजे से शाम ७ बजे तक संपूर्ण वैदिक पध्दति नुसार यह पूजन और अखंड पठन किया गया। हजारो श्रद्धावानों ने इस उत्सव मे सहभागी होकर सुंदरकाण्ड का लाभ उठाया।

६) सुंदरकाण्ड पुस्तिका कहाँ मिलेगी? :

sundarkand

 

सीधे-साधे एवं सरल भाषा मे संपूर्ण अर्थसहित यह सुंदरकाण्ड पुस्तिका ई-बुक के स्वरूप में आंजनेयाय ई शॉप पर उपलब्ध होगी।

ई शॉप.