AniruddhaFoundation-Tree-Plantation

प्रस्तावना:

सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध बापूजी के प्रेरणाद्वारा उनकी संकल्पना और आशीर्वाद के कारण ‘सद्‌गुरु श्रीअनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन’ इस संस्था ने इस परिस्थिती की गंभीरता और समस्या के मूल कारण को ध्यान में रखते हुए ‘वृक्षारोपण मुहिम’ की शुरुआत की। इस गंभीरता और जागरुकता को जन सामान्य तक पहुँचाने के लिए वैयक्तिगत स्तर पर कुछ उपाययोजनाँए शुरु की गई हैं। श्रीअनिरुद्ध उपासना फाऊंडेशन, अनिरुद्ध समर्पण पथक और अनिरुद्धाज्‌ ऍकॅडमी ऑफ डिझास्टर मॅनेजमेंट इनके सहयोग से वृक्षारोपण मुहिम चला रहे हैं। संस्था के श्रद्धावान निष्काम भाव से इस मुहिम के अंदर अपनी खुशी से भाग लेते हैं। आज तक वृक्षों का रोपण और संवर्धन किया गया है।

बड़े प्रमाण में किए गए विशिष्ट प्रकार के वृक्षों व पेड़ पौधों का रोपण करना यह आज तक किए गए बेसुमार जंगल तोड़ जिसके परिणाम स्वरूप पृथ्वी की धूप(गर्मी), भूजल का स्तर कम होना, जागतिक तापमान का बढ़ना इन सब पर यह रामबाण उपाय सिद्ध होगा।

वनस्पति जो प्राणवायु का उत्सर्जन करती है, यह हम सबकी प्राथमिक और मूलभूत आवश्यकता है। उसी प्रकार से ग्लोबलवार्मींग (जागतिक तापमान में हुए वृद्धि) का मूल कारणवाले कार्बनडायऑक्साईड को ये वनस्पतियाँ ग्रहण करती हैं, जो हमारे लिए बहुत ही हितकारी है। अर्थात वृक्ष हमें जो चाहिए वहीं देते हैं। जो हमारे लिए हानिकारक है, अपायकारक है उसे वे स्वयं ग्रहण करके उससे सुंदर अन्न, फल, फूल इत्यादि बनाते हैं।

हमारी सबसे प्राथमिक आवश्यकता अर्थात शुद्ध हवा, अन्न, जल ये सारी चीजें जो वनस्पतियाँ हमें देती ही हैं किन्तु अतिशय महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वे बरसाती बादलों को आकर्षित करके (रोक करके) वर्षा करवाते हैं। इसके अलावा मनुष्यों के अन्य अनेक आवश्यकताओं जैसे कपड़े, कागज, फर्निचर, औषधि इत्यादि की भी पूर्तता करते हैं।

महत्त्वपूर्ण पौधे वृक्ष:

सर्वप्रथम जहाँ हमारे लिए मुमकीन है वहाँ पर हम पौधे लगाएँगे। हम जिस सोसायटी में रहते हैं वहाँ पर, अपने घर की गैलरी में लगाएँगे। हर किसी के घरों में तुलसी, गुलाब, मोगरा, झिपरी, अदरक, कढ़ीपत्ता ये पौधे जरूर लगाने चाहिए, जिसके कारण घर में उचित प्रमाण में प्राणवायु का स्तर बनाने में मदत होगी, और वनीकरण कार्बनडायऑक्साईड का प्रमाण कम होगा।

भूतकाल की घटना:

वृक्षारोपण के कारण वातावरण में उचित परिवर्तन तो होता ही है, किन्तु जब जब अकाल/सूखा जैसी नैसर्गिक आपत्तियाँ आती हैं, उस समय जीवित रहने के लिए ये वनस्पतियाँ अमृत की तरह वरदान साबित होती हैं। इसवी सन १९७३-७४ के समय जब देश में भीषण अकाल/सूखा पड़ा था, तब बिहार के ग्रामीणों की जान महुआ (एक तरह का फल) के वृक्ष ने बचाया था। इस वृक्ष के बीज, छिलके, पत्ते, फूल, फल, डालियाँ लोगों ने समय पड़ने पर भूजकर, पकाकर खाया। अन्न के रूप में वह सिर्फ पौष्टिक ही न होकर उत्साहवर्धक भी था। निसर्ग में इसतरह के अनेक विस्मयकारक वृक्ष हैं, जिसका प्रत्येक भाग मानव के लिए अत्यंत उपयोगी होता है।

वृक्षारोपण का आध्यात्मिक लाभ:

वृक्षारोपन करना प्रत्येक के लिए आवश्यक है, क्योंकि वे सम्पूर्ण मानवजाति के रक्षण के लिए अत्यंत कल्याणकारी हैं। आनेवाले भविष्य के रामराज्य की संकल्पना में इसका महत्त्वपूर्ण योगदान रहेगा।
भविष्य के शुद्ध हवा के लिए, आरोग्य के लिए, पर्यावरण के लिए और निरोगी आरोग्य (स्वास्थ्य) के लिए वृक्ष होना ही चाहिए।

संत तुकाराम महाराज कहते हैं, ‘वृक्षवल्ली आम्हा सोयरी वनचरे।’ यह पंक्ति अत्यंत महत्त्वपूर्ण है।
परमेश्वरीय योजनानुसार प्रत्येक मनुष्य के लिए –

१००० – महावृक्ष – वरगद, पीपल, नारियल इत्यादि

२००० – वृक्ष – आम, बरगद, कटहल, पलाश इत्यादि

३००० – छोटेवृक्ष – चिकू, सीताफल, चंपा इत्यादि

४००० – पौधे – गुलाब, मोगरा, गोंडा इत्यादि

५००० – घास की तरह पौधे – चावल, गेहूँ, मकाई, गन्ना इत्यादि
का होना आवश्यक है।

यह प्रमाण रामराज्य की संकल्पना का एक अविभाज्य घटक है।

यह संतुलन जितने प्रमाण में गिरने लगता है उतने प्रमाण में संपूर्ण मानवसमाज को नैसर्गिक आपत्तियों और अनारोग्यों का सामना करना पड़ता है। और इसीलिए हमें इस वनस्पति सृष्टि की, बागों की, बनों की, जंगलों की निगरानी करनी है।

हमारे घर के आस-पास की जगह में, शाला के आंगन में कार्यालयीन इमारतों के चारों ओर और सड़कों के दोनों ओर वृक्ष लगाएँ व उनका संवर्धन करें। हमारे पास असंख्य उद्यान, बाग, वन, जंगल, इनका संवर्धन हो। हमारे घर का सौंदर्य वृक्ष बढ़ाते रहें। परमेश्वर के चरणों में हमारी यही प्रार्थना है कि हमारी यह वसुंधरा सदैव हरीभरी रहे!

सुजलाम्‌ सुफलाम्‌ बनी रहे।